समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 14 अगस्त: कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया — पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के देश छोड़कर माल्टा बस जाने की खबर। यह दावा इतनी तेजी से फैला कि कई लोगों ने इसे सच मान लिया, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
‘वोट चोरी’ विवाद और राजीव कुमार का नाम
राजीव कुमार के नेतृत्व में 2024 का लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनाव आयोजित हुए थे। फरवरी 2025 में उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। इसी दौरान, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने कई राज्यों में ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए, जिन चुनावों की निगरानी राजीव कुमार ने की थी। इससे उनका नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया।
सोशल मीडिया पर अफवाह कैसे फैली
कुछ यूजर्स ने X (पूर्व ट्विटर) पर दावा किया कि राहुल गांधी के आरोपों के बाद राजीव कुमार ने भारत छोड़ दिया और माल्टा जाकर बस गए। यहां तक कि कुछ ने कहा कि उन्होंने माल्टा की नागरिकता ले ली। इस दावे में विपक्षी नेताओं के भी पोस्ट शामिल थे।
हकीकत आई सामने
पीटीआई और राजीव कुमार के करीबी सूत्रों ने इस बात का खंडन किया है। उनके अनुसार, राजीव कुमार देश में ही मौजूद हैं और विदेश जाने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इसे अफवाह बताते हुए पोस्ट किए और कहा कि इस दावे का कोई ठोस सबूत नहीं है।
राजीव कुमार का कार्यकाल और उपलब्धियां
अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में राजीव कुमार ने 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव कराए। इनमें 2024 का लोकसभा चुनाव भी शामिल है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कई अहम सुधार किए, जैसे—
- मतदाता पंजीकरण के लिए साल में चार तिथियों का प्रावधान।
- ईआरओनेट 2.0 के जरिए मतदाता सूचियों का डिजिटलीकरण।
- ‘मिथक बनाम वास्तविकता’ रजिस्टर की शुरुआत, ताकि चुनावों को लेकर फैलाई जाने वाली गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
विवाद और विपक्षी हमले
राहुल गांधी के आरोपों के बाद, तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और मांग की कि राजीव कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। उनका आरोप था कि राजीव कुमार के कार्यकाल में मतदाता सूची में गंभीर त्रुटियां रहीं।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें अक्सर सच्चाई से बहुत दूर होती हैं। राजीव कुमार के माल्टा बसने का दावा इसी श्रेणी में आता है। उनके खिलाफ लगाए गए राजनीतिक आरोप और अफवाहें, दोनों ही मौजूदा सियासी माहौल में माहिर प्रचार रणनीति का हिस्सा लगते हैं।
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