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January 11, 2026

परछाईं

यह मैं नहीं, मेरी परछाईं है, जो यहाँ हज़ारों मील दूर चली आई है। मेरा दिल तो भारत में रहता है, जहाँ रहते मेरे पिता, मेरी माई हैं। वैसे तो भारत में भी कोई कमी न थी, किंतु विदेश में बसने के लालच ने कहीं का न छोड़ा। अब यह दौलत भी किस काम आई…