प्रधानमंत्री मोदी करेंगे 28वें सीएसपीओसी का उद्घाटन, नई दिल्ली में वैश्विक संसदीय जुटान

संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष से वैश्विक संसदीय कूटनीति को मिलेगा नया आयाम

  • प्रधानमंत्री उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगे और पीठासीन अधिकारियों से संवाद करेंगे
  • एआई, सोशल मीडिया, नागरिक सहभागिता और सांसदों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा
  • लोक सभा अध्यक्ष ने कई देशों के संसदीय नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें कीं
  • 53 राष्ट्रमंडल संसदों के अध्यक्ष/पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में भाग लेंगे

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 15 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज प्रातः 10:30 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर के संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (सीएसपीओसी) के 28वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर संसदीय लोकतंत्र और संसदीय कूटनीति को दिए जा रहे भारत के महत्व को रेखांकित करता है।

उद्घाटन सत्र और संवाद

उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री का मुख्य भाषण होगा। इसके बाद वे राष्ट्रमंडल एवं स्वायत्त संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के साथ अनौपचारिक संवाद करेंगे। इस अवसर पर समूह छायाचित्र भी लिया जाएगा।

14–16 जनवरी तक सम्मेलन, 53 देशों की भागीदारी

भारत की संसद, सीएसपीओसी सचिवालय के समन्वय से, 14 से 16 जनवरी 2026 तक इस सम्मेलन की मेजबानी कर रही है। सम्मेलन में राष्ट्रमंडल के 53 राष्ट्रीय संसदों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक शासन और संवैधानिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने में विधायिकाओं की विकसित होती भूमिका पर विचार-विमर्श करना है।

समकालीन मुद्दों पर मंथन

सम्मेलन की कार्यवाही में आधुनिक विधायिकाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी, जिनमें संसदीय कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उत्तरदायी उपयोग, सार्वजनिक विमर्श पर सोशल मीडिया का प्रभाव, मतदान से आगे नागरिक सहभागिता बढ़ाने के नवाचारी उपाय, तथा सांसदों और संसदीय अधिकारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण शामिल हैं।

लोक सभा अध्यक्ष की सक्रिय भूमिका

28वें सीएसपीओसी के अध्यक्ष के रूप में लोक सभा अध्यक्ष ने 14 जनवरी को लाल किले के संगीति सम्मेलन कक्ष में सीएसपीओसी की स्थायी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक से पहले प्रतिनिधियों को लाल किले का मार्गदर्शित भ्रमण कराया गया और विशेष प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिससे भारत की सभ्यतागत विरासत का परिचय मिला।

द्विपक्षीय संवाद और सहयोग

सम्मेलन के इतर लोक सभा अध्यक्ष ने कनाडा, श्रीलंका, सेशेल्स, मालदीव, केन्या, ग्रेनेडा और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के संसदीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में संसदीय सहयोग, संस्थागत मजबूती और आपसी अनुभवों के आदान-प्रदान पर चर्चा हुई।

भारत की विरासत और प्रतिबद्धता

भारत इससे पहले 1971, 1986 और 2010 में सीएसपीओसी की मेजबानी कर चुका है। 28वें संस्करण की मेजबानी इस परंपरा को आगे बढ़ाती है और राष्ट्रमंडल संसदीय मंच पर भारत की सतत सहभागिता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.