रेहड़ी पटरी वालों की सुरक्षा पर जोर, कानून के पालन की अपील

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 2अगस्त। शहरी गरीबों के मुद्दों पर चर्चा करते हुए, एक प्रमुख नेता ने रेहड़ी पटरी वालों के बारे में चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण कानून, जिसे उन्होंने स्वयं बनाया और कैबिनेट से पास कराया, आज पूरे देश में लागू किया जा रहा है। लेकिन, उनके अनुसार, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत मिलने वाले धन के बावजूद, रेहड़ी पटरी वालों को उनके स्थलों से हटाया जा रहा है।

नेता ने आरोप लगाया कि जबकि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी पटरी वालों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, वे उसी योजना के लाभार्थी अब अपने स्थानों से बेदखल हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र में भी यह समस्या उत्पन्न हो रही है, जैसे रामनगर, शीतला घाट, लंका, सारनाथ और भिकारीपुर।

केंद्रीय कानून के अनुसार, धारा तीन उपधारा तीन के तहत, किसी भी विक्रेता को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक उसे वेंडिंग सर्टिफिकेट नहीं मिल जाता। इसके बावजूद, कई स्थानों पर जैसे दिल्ली के दक्षिण पुरी, पानी की टंकी, और अन्य इलाकों में और कोलकाता, भोपाल, उत्तराखंड के रुद्रपुर और देहरादून में, जहां लोगों को स्वनिधि योजना के तहत लोन और सर्टिफिकेट मिले हैं, फिर भी उन्हें हटाया जा रहा है।

नेता ने कहा कि रेहड़ी पटरी वालों को पैसे की नहीं, बल्कि सुरक्षा की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और स्थानीय एजेंसियों द्वारा इनसे पैसे लिए जा रहे हैं और यह स्थिति शर्मनाक है। उनका कहना था कि 10,000 रुपये के लोन के बावजूद, रोज-रोज पैसे देने से उनकी स्थिति और खराब हो रही है।

उन्होंने अपील की कि राज्य के मंत्रियों को बुलाकर इस कानून के पालन पर ध्यान दिया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण कानून का सही तरीके से पालन हो। उनका मानना है कि इस कानून का सही पालन शहरी गरीबों के जीवन में सुधार ला सकता है और उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

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