शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल की यूजीसी अध्यक्ष और सचिव से विस्तृत भेंट वार्ता

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 जनवरी। नियुक्ति और पदोन्नति के प्रावधानों को व्यवहारिक बनाने की मांग

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार और सचिव प्रो. मनीष जोशी से मुलाकात कर ड्राफ्ट रेगुलेशन 2025 की विसंगतियों पर चर्चा की। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने बताया कि इस बैठक में शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े प्रावधानों पर जमीनी स्तर की समस्याओं को यूजीसी के समक्ष रखा गया।

महासंघ ने कुलपति पद के लिए ब्यूरोक्रेट और उद्योगपतियों को पात्र मानने का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रो. गुप्ता ने कैरियर एडवांसमेंट योजना में पीएचडी की अनिवार्यता को केवल एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों तक सीमित करने, नॉटेबल कंट्रीब्यूशन के मानदंडों को व्यवहारिक बनाने, एकेडमिक लेवल 15 के प्रमोशन का लाभ महाविद्यालय शिक्षकों को देने और 10% की सीमा हटाने जैसे अहम मुद्दों को उठाया। महासंघ ने आठवें वेतन आयोग से पहले सेवा शर्तों में बदलाव का भी विरोध किया।

भाषाई अध्ययन और शोध पत्र प्रकाशन को प्राथमिकता देने की मांग

महासंघ की राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. गीता भट्ट ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय भाषाओं में अध्ययन, अध्यापन और शोध पत्र प्रकाशन को नियुक्ति और पदोन्नति में प्राथमिकता देने की मांग की। साथ ही, पीएचडी के लिए सवैतनिक अध्ययन अवकाश का प्रावधान करने, सीएएस पदोन्नति का लाभ पात्रता तिथि से लागू करने, प्राचार्य पद की नियुक्ति को सेवानिवृत्ति तक सुनिश्चित करने और संविदा पर स्वीकृत शैक्षणिक पदों की सीमा 20% तक रखने की सिफारिश भी की गई।

यूजीसी रेगुलेशन के उल्लंघन पर लोकपाल नियुक्त करने की सिफारिश

प्रो. भट्ट ने बताया कि महासंघ ने यूजीसी रेगुलेशन के उल्लंघन की शिकायतों के पारदर्शी समाधान के लिए लोकपाल नियुक्त करने की मांग रखी। शिक्षकों का कार्यभार निर्धारित करने, शिक्षण संस्थानों में कार्यकाल की न्यूनतम अवधि 5 घंटे प्रति दिवस रखने, रिफ्रेशर और ओरियंटेशन कोर्स ऑफलाइन कराने और शिक्षकों को ऑन ड्यूटी मानने, सीएएस पदोन्नति में नेट और पीएचडी में भेदभाव खत्म करने, नियुक्ति के लिए शॉर्टलिस्टिंग के स्पष्ट मानदंड बनाने और पदोन्नति के लिए पुराने रेगुलेशन के विकल्प हेतु न्यूनतम 5 वर्ष की अवधि रखने पर भी चर्चा की गई।

यूजीसी का सकारात्मक रुख

यूजीसी अध्यक्ष और सचिव ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इन मुद्दों पर उचित विचार कर निर्णय लिया जाएगा।

इस प्रतिनिधिमंडल में महासंघ के अध्यक्ष और महामंत्री के अलावा राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्रा, अतिरिक्त महामंत्री प्रो. अरबिंदो महतो, सचिव प्रो. प्रदीप खेड़कर और सहसचिव प्रो. जसपाल वरवाल शामिल थे।

 

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