“शहबाज शरीफ की फर्जी शौर्य गाथा का पर्दाफाश! पाकिस्तानी अखबार ने ही खोल दी झूठ की पोल”

जीजी न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली,16 मई ।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उस वक्त तगड़ा झटका लगा जब उनके ही देश के एक अखबार ने उनकी झूठी बहादुरी की कहानी की हवा निकाल दी। जो बयान दुनिया के सामने पाकिस्तान की एयरफोर्स को हीरो बनाने के लिए दिया गया था, वो अब खुद की बदनामी का सबब बन गया है।

दरअसल, शहबाज शरीफ ने बीते दिनों एक सार्वजनिक मंच पर पाकिस्तान एयरफोर्स की “साहसिक कार्रवाई” का बखान करते हुए दावा किया था कि उनकी सेना ने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया, और एयरस्पेस को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया। उन्होंने इसे “बहादुरी का मिसाल” बताते हुए पाकिस्तान को गर्व का एहसास दिलाने की कोशिश की।

लेकिन… सच छिप नहीं पाया!

इस बयान के कुछ ही दिन बाद एक प्रतिष्ठित पाकिस्तानी अखबार ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में इस “झूठी बहादुरी” का भंडाफोड़ कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि जिस घटना को एयरफोर्स की वीरता बताकर प्रचारित किया गया, वो दरअसल एक योजनाबद्ध पीआर स्टंट था — जिसमें तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया, और असली हालात को जनता से छिपाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन कोई मिसाइल हमला हुआ ही नहीं था। न कोई दुश्मन ड्रोन पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हुआ, और न ही कोई इंटरसेप्ट ऑपरेशन हुआ। सारा मामला सिर्फ एक संदिग्ध रडार सिग्नल को ‘घातक हमला’ बताने का ढोंग था, जिसे शहबाज सरकार ने बहादुरी के तमगे में तब्दील कर दिया।

जैसे ही ये रिपोर्ट सामने आई, पाकिस्तानी जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सोशल मीडिया पर #ShahbazKaJhoot ट्रेंड करने लगा। कई यूज़र्स ने लिखा कि जब देश आर्थिक बदहाली और आतंकवाद की मार झेल रहा है, तब नेता झूठी कहानियों से आत्ममुग्धता में डूबे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज शरीफ की ये झूठी वीरता सिर्फ जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए रची गई कहानी थी। बढ़ती महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था, IMF की शर्तों से जकड़ी सरकार — इन तमाम मुद्दों से बचने के लिए एक नकली “देशभक्ति शो” पेश किया गया।

जब देश के सबसे बड़े पद पर बैठा नेता आत्मगौरव के लिए झूठ का सहारा लेने लगे, तो समझिए हालात कितने बदतर हो चुके हैं। शहबाज शरीफ का झूठ अब सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि पाकिस्तानी हुकूमत की गिरती साख का आईना बन चुका है।

अब सवाल ये है: क्या पाकिस्तान की जनता बार-बार झूठे ‘हीरो’ बनाए जाने की कहानी में भरोसा करेगी या इस बार सच की लड़ाई लड़ेगी?

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