राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर मचा सियासी घमासान, बीजेपी का तीखा पलटवार: “सेना का अपमान, मानसिकता हुई रोगी”

समग्र समाचार सेवा,

नई दिल्ली, 4 जून:  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए “नरेंदर सरेंडर” वाले बयान पर सियासत गर्मा गई है। मध्यप्रदेश में दिए गए इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ा पलटवार करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की और राहुल गांधी पर देश की सेना और संप्रभुता का अपमान करने का आरोप लगाया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल के बयान को “पाकिस्तानी सोच से प्रेरित” बताया और कांग्रेस के इतिहास में कथित ‘सरेंडर’ की एक लंबी फेहरिस्त गिनाई।

सुधांशु त्रिवेदी का हमला: “राहुल गांधी का बयान ISI से भी दो कदम आगे”

बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य सफलता को ‘सरेंडर’ से जोड़ दिया, यह दिखाता है कि उनकी मानसिकता कितनी रोगी और खतरनाक हो चुकी है। उन्होंने जो कहा है, वह तो पाकिस्तान के किसी संगठन या जनरल ने भी नहीं कहा।”

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पाकिस्तान के ‘सिरमौर’ बनने की कोशिश कर रहे हैं और उनके भाषण से भारतीय सेना का अपमान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी में नेता प्रतिपक्ष जैसी गंभीरता और परिपक्वता का घोर अभाव है।

‘सरेंडर कैलेंडर’ से कांग्रेस को घेरा

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए एक ‘सरेंडर कैलेंडर’ भी प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के इतिहास के ऐसे कई निर्णयों को शामिल किया जिन्हें उन्होंने ‘राष्ट्रीय आत्मसमर्पण’ बताया:

  • 1947: भारत का एक तिहाई हिस्सा जिन्ना को देकर झुक जाना
  • 1948: पाकिस्तान को पीओके सौंप देना
  • 1960: सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को 80% पानी देना
  • 1962: अक्साई चीन पर चीन का कब्जा होने देना
  • 1965: ताशकंद समझौते के दौरान रणनीतिक बढ़त के बावजूद पीछे हटना
  • 1971: युद्ध में जीत के बावजूद पीओके को वापस न लेना और 93,000 पाक सैनिकों को रिहा कर देना
  • 1996: पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा देना
  • 2009: शर्म अल शेख में आतंकवादी हमले के बावजूद बातचीत जारी रखना
  • 2011: राहुल गांधी द्वारा ‘आतंकवाद को रोकना असंभव’ कहना
  • 2023: अमेरिका में भारत-विरोधी टिप्पणियां करना

“सेना का अपमान बर्दाश्त नहीं”

बीजेपी ने राहुल गांधी से माफी की मांग करते हुए कहा कि जब देश आतंकवाद पर निर्णायक कार्रवाई करता है, तब इस प्रकार की बयानबाजी सेना के मनोबल को गिराने वाली है। त्रिवेदी ने कहा, “आप बीजेपी और पीएम मोदी की आलोचना करें, हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन देश की संप्रभुता, सेना और आत्मगौरव पर हमला हमें स्वीकार नहीं।”

राहुल गांधी का बयान क्या था?

मंगलवार को मध्यप्रदेश दौरे पर राहुल गांधी ने कहा था, “मैं बीजेपी और आरएसएस वालों को जानता हूं। थोड़े से दबाव में ये डर जाते हैं। ट्रंप का एक फोन आया और नरेंद्र मोदी जी ने तुरंत सरेंडर कर दिया।” उन्होंने आगे कहा, “1971 में अमेरिका की धमकी के बावजूद कांग्रेस ने पाकिस्तान को तोड़ दिया था। कांग्रेस के बब्बर शेर कभी झुकते नहीं हैं।”

राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित की ज़रूरत

बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी की भाषा और शैली, जानबूझकर पाकिस्तान की भाषा से मेल खा रही है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष को भी जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। ऐसे समय में जब भारतीय सेना आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रही है, विपक्षी नेताओं को संकीर्ण राजनीतिक लाभ से ऊपर उठना होगा।

 

 

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