समग्र समाचार सेवा,
गुवाहाटी (असम), 4 जून: हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु नदी का जल रोकने की घोषणा के जवाब में पाकिस्तान ने नई चेतावनी दी है। पाकिस्तान का कहना है कि चीन ब्रह्मपुत्र नदी का जल रोक सकता है, जिससे भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, विशेषकर असम में सूखा पड़ सकता है।
इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यह आशंका न केवल गुमराह करने वाली है, बल्कि तथ्यों से परे है।
सीएम सरमा ने आंकड़ों से किया जवाब
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी का केवल 30 से 35 प्रतिशत जल चीन से आता है। शेष 65 से 70 प्रतिशत पानी भारत के भीतर अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नगालैंड में होने वाली मूसलधार बारिश और सहायक नदियों से आता है।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान भ्रम फैलाकर भारत को डराना चाहता है, लेकिन ब्रह्मपुत्र पर भारत की निर्भरता चीन के जल पर नहीं है। यह नदी हमारे भूगोल और जलवायु से पोषित होती है।”
सहायक नदियों का योगदान भी अहम
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी को जल देने वाली प्रमुख सहायक नदियाँ जैसे सुबनसिरी, लोहित, कामेंग, और अन्य स्थानीय नदियाँ पूरे साल जल प्रवाह बनाए रखती हैं। मानसून के दौरान यह प्रवाह कई गुना बढ़ जाता है।
मानसून में जल प्रवाह बढ़ने का तथ्य
सरमा ने बताया कि मानसून के समय ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवाह 2,000–3,000 क्यूमेक्स (घन मीटर प्रति सेकंड) से बढ़कर 15,000–20,000 क्यूमेक्स तक हो जाता है। यह दर्शाता है कि चीन अगर पानी रोके भी, तो इसका असम या पूर्वोत्तर पर प्रभाव बहुत सीमित होगा।
पाकिस्तान का डर फैलाने का प्रयास
सीएम सरमा ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि के निरस्त होने से बौखलाया हुआ है और अब ब्रह्मपुत्र के जल को लेकर भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि
“यह भारत के आत्मनिर्भर और भू-आधारित जल स्रोतों की गलत समझ को दर्शाता है। पाकिस्तान को पहले अपने देश की हालत सुधारनी चाहिए, भारत को धमकाने की नहीं।”
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