ठाकरे भाइयों पर गरजे सपा सांसद राजीव राय, बोले- मराठी भाषा को गुंडागर्दी से मत जोड़ो

समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 8 जुलाई: महाराष्ट्र में भाषा विवाद ने एक बार फिर राजनीति को गरमा दिया है। मराठी अस्मिता के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे पूरे 20 साल बाद एक साथ मंच पर आए, लेकिन इसी बीच समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने दोनों ठाकरे भाइयों पर करारा वार कर दिया है।

भयंदर में फूड स्टॉल पर मारपीट से विवाद

हाल ही में ठाणे के भयंदर इलाके में मनसे का स्कार्फ पहने कुछ कार्यकर्ताओं ने एक फूड स्टॉल मालिक की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी, क्योंकि वह मराठी नहीं बोल पा रहा था। इस घटना ने ठाकरे बंधुओं के ‘मराठी गौरव’ अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजीव राय का सोशल मीडिया पर तीखा हमला

समाजवादी पार्टी के घोसी से सांसद राजीव राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट लिखते हुए सीधे राज ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब कोई पूछता ही नहीं तो मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए हिंदी भाषी गरीबों के साथ गुंडागर्दी क्यों? उन्होंने कहा कि मराठी भाषा संस्कार की भाषा है, गुंडागर्दी की नहीं।

‘दम है तो बॉलीवुड को बाहर करो!’

राजीव राय ने तंज कसते हुए लिखा कि जिस हिंदी सिनेमा से ठाकरे परिवार ने अरबों की कमाई की, उस इंडस्ट्री के खिलाफ राज ठाकरे कभी कुछ क्यों नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि अगर इतना ही दम है तो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को मुंबई से बाहर निकाल कर दिखाएं। उन्होंने याद दिलाया कि हजारों मराठी परिवार भी हिंदी सिनेमा से ही अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।

शिवाजी महाराज सिर्फ महाराष्ट्र के नहीं

सपा सांसद ने कहा कि यह देश भाषा के नाम पर किसी के बाप का नहीं हो सकता। हर मराठी मानुष पूरे देश में सम्मान के साथ रहता है, वैसे ही हर हिंदी भाषी का भी अधिकार है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ ठाकरे भाइयों के नहीं, पूरे देश के नायक हैं।

राजीव राय ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा कि भारत की पहचान ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना से है, दो कौड़ी की गुंडागर्दी से नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि गुंडागर्दी का इलाज भी होता है और वह सही तरीके से किया जाएगा।

ठाकरे भाइयों ने मनाई ‘विजय रैली’

महाराष्ट्र में हाल ही में फडणवीस सरकार ने तीन भाषा नीति लागू की थी, लेकिन विरोध के बाद सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा। इसी को अपनी जीत बताकर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने विजय रैली निकाली और पुराने मतभेद भुलाकर एक मंच पर आ गए। लेकिन भयंदर की घटना ने इस ‘विजय’ में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

 

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