ट्रंप का बड़ा झटका: 14 देशों पर टैरिफ का ऐलान, भारत को फिलहाल राहत

समग्र समाचार सेवा
वॉशिंगटन डीसी, 8 जुलाई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को ऐलान किया कि 1 अगस्त 2025 से 14 देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। इस लिस्ट में एशिया के दो बड़े सहयोगी जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं।

जापान और दक्षिण कोरिया पर 25% टैरिफ

व्हाइट हाउस में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ साझा प्रेस वार्ता में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका निष्पक्षता के साथ काम कर रहा है और जो देश अमेरिकी शर्तें नहीं मानेंगे, उन्हें ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मित्र देशों पर भी 25% आयात कर लगाने का फैसला व्यापार संतुलन के लिए बताया जा रहा है।

ट्रंप ने यह भी साफ किया कि अमेरिका पहले ही यूनाइटेड किंगडम और चीन के साथ व्यापार समझौते कर चुका है और अब बाकी देशों से भी समझौते की कोशिश की जा रही है।

भारत को फिलहाल राहत, बातचीत अंतिम दौर में

ट्रंप ने प्रेस वार्ता में खास तौर पर भारत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत पर कोई नया टैरिफ लागू नहीं किया गया है। इसके पीछे कारण यह है कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक व्यापार समझौता अंतिम दौर में है। पिछले महीने भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी अधिकारियों के साथ अहम बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश की थी। माना जा रहा है कि जल्द ही यह डील सार्वजनिक हो सकती है।

कौन-कौन से देश हैं टैरिफ की जद में

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर उन 14 देशों के नामों की सूची और टैरिफ पत्र के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, कजाकिस्तान, लाओस, दक्षिण अफ्रीका, ट्यूनीशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना और सर्बिया शामिल हैं।

इन देशों पर टैरिफ की दरें 25% से लेकर 40% तक तय की गई हैं। बांग्लादेश और सर्बिया पर 35% जबकि म्यांमार और लाओस पर 40% टैक्स लगेगा। पत्रों में चेतावनी दी गई है कि अगर कोई देश अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैक्स लगाएगा, तो अमेरिका भी कार्रवाई करेगा।

नीतियों में बदलाव पर मिल सकती है छूट

ट्रंप ने संकेत दिए कि अगर कोई देश अपनी व्यापार नीतियों में बदलाव करता है, तो उसे टैरिफ में राहत मिल सकती है। लेकिन जो देश अमेरिकी हितों को नजरअंदाज करेंगे, उन्हें कठोर आर्थिक कदमों का सामना करना पड़ेगा।

 

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