समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 5 अगस्त: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से हर साल फीस बढ़ाने पर रोक लगाने के उद्देश्य से Delhi School Education (Transparency in Fixation and Regulation of Fees) Bill, 2025 विधानसभा में पेश कर दिया है। यह बिल राजधानी में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस बिल के मुताबिक, कोई भी प्राइवेट स्कूल तीन वर्षों में केवल एक बार ही फीस बढ़ा सकता है और वह भी तभी, जब स्कूल स्तर की एक 11 सदस्यीय समिति इस पर सहमति दे। इस समिति में 5 अभिभावक, 3 शिक्षक, स्कूल प्रिंसिपल, स्कूल प्रबंधन द्वारा नियुक्त चेयरमैन और जिला प्रशासन द्वारा नामित एक ऑब्जर्वर शामिल होंगे।
बिल में क्या हैं अहम प्रावधान?
बिल के क्लॉज़ 5 के अनुसार, फीस बढ़ाने के लिए स्कूल को पहले समिति को उचित कारण बताने होंगे। यदि समिति बहुमत से प्रस्ताव पास करती है, तभी फीस बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, बढ़ाई गई फीस तीन सालों तक लॉक रहेगी यानी उस अवधि में कोई और बढ़ोतरी संभव नहीं होगी।
अगर अभिभावकों को फीस बढ़ोतरी पर आपत्ति हो तो वे पहले जिला स्तरीय समिति में अपील कर सकते हैं। इस समिति में एक शिक्षाविद, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षा विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी समेत कुल 6 सदस्य होंगे। इसके बाद भी अगर फैसला पक्ष में न आए तो अंतिम अपील शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता वाली समिति में की जा सकेगी।
विपक्ष ने जताया विरोध
हालांकि, इस बिल को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने आरोप लगाया कि यह बिल उद्योगपतियों और निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है।
उन्होंने ABP न्यूज़ से बातचीत में कहा, “बिल में जो स्कूली समिति का गठन प्रस्तावित है, उसमें संतुलन नहीं है और यह निजी स्कूलों के पक्ष में झुकी हुई है। साथ ही, अदालत में अपील का अधिकार छीनना भी अभिभावकों के हितों के खिलाफ है।” उन्होंने मांग की कि इस बिल को दिल्ली विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाए।
सरकार का जवाब
वहीं, दिल्ली सरकार में मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने AAP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि, “आप पार्टी ने बिल को ठीक से पढ़ा ही नहीं और अब वे सेलेक्ट कमेटी की बात कर रहे हैं। सरकार पारदर्शिता लाना चाहती है, जबकि AAP सिर्फ राजनीति कर रही है।”
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