समग्र समाचार सेवा
कोलकाता, 10 अगस्त: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और पार्टी की सहयोगी महुआ मोइत्रा के बीच जारी विवाद अब तीखी व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया है। कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा को “निम्न स्तर” का बताते हुए कहा कि उनके बारे में चर्चा करना “समय और ऊर्जा की बर्बादी” है, जबकि महुआ ने पहले उन्हें “सुअर” कहकर संबोधित किया था।
विवाद की जड़: शादी से लेकर ‘सुअर’ तक
दोनों नेताओं के बीच तनाव तब बढ़ा जब कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा की शादी पर टिप्पणी की। इसके जवाब में महुआ ने एक पॉडकास्ट में बनर्जी को “सुअर” कह डाला।
महुआ ने कहा—
“आप सुअर से कुश्ती नहीं लड़ते। क्योंकि सुअर को यह पसंद है और आप गंदे हो जाते हैं।”
महुआ ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय संसद में हर पार्टी में “घोर स्त्री-द्वेषी, यौन रूप से कुंठित, भ्रष्ट पुरुष” मौजूद हैं।
कल्याण बनर्जी की सफाई और पछतावा
पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने कहा—
“वह महिला मेरे विषय से संबंधित नहीं हैं और वह बहुत ही निम्न स्तर की हैं। उनके बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है।”
उन्होंने स्वीकार किया कि गुस्से में उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी (दीदी) से कुछ बातें कह दी थीं, जिन पर अब उन्हें पछतावा है।
एक वकील के संदेश से बदला नजरिया
श्रीरामपुर के सांसद ने बताया कि एक जूनियर वकील के टेक्स्ट मैसेज ने उनकी सोच बदल दी।
“वह मेरे ध्यान के लायक नहीं हैं। मैंने उन पर ध्यान देकर गलती की।”
TMC में पद परिवर्तन
विवाद के बाद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। पार्टी ने काकोली घोष दस्तीदार को नया मुख्य सचेतक और शताब्दी रॉय को सदन में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया।
सोशल मीडिया पर पलटवार
महुआ की टिप्पणियों के बाद, बनर्जी ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा—
“एक साथी सांसद की तुलना ‘सुअर’ से करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह नागरिक संवाद के बुनियादी मानदंडों की अनदेखी है।”
उन्होंने आगे कहा—
“जो लोग सोचते हैं कि गाली-गलौज से सार की जगह ली जा सकती है, उन्हें अपनी राजनीति पर गौर करना चाहिए। यह ताकत नहीं, बल्कि असुरक्षा को दर्शाता है।”
राजनीति में भाषा की गरिमा पर सवाल
यह विवाद भारतीय राजनीति में भाषा और आचरण की मर्यादा को लेकर बहस छेड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि व्यक्तिगत हमलों और अपमानजनक भाषा से न केवल पार्टी की छवि प्रभावित होती है, बल्कि जनता का विश्वास भी डगमगा सकता है।
आगे क्या?
TMC नेतृत्व ने अब तक इस विवाद पर सार्वजनिक टिप्पणी से परहेज किया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि आंतरिक रूप से स्थिति को शांत करने की कोशिश जारी है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यह टकराव 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर असर डाल सकता है।
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