राहुल गांधी के मार्च में शशि थरूर बोले – चुनाव आयोग को संदेह दूर कर साख बहाल करनी चाहिए

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 11 अगस्त: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी दलों ने सोमवार को संसद भवन के मकर द्वार से लेकर भारत निर्वाचन आयोग तक मार्च निकाला। इस मार्च का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाना था। मार्च में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर टिप्पणी की।

चुनाव आयोग की साख पर शशि थरूर का बयान
शशि थरूर ने कहा कि जब तक जनता के मन में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर संदेह रहेगा, तब तक यह चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचाता रहेगा।
“जैसे ही इन संदेहों को दूर कर दिया जाएगा, आयोग की साख और विश्वसनीयता वापस आ जाएगी। यह आयोग के हित में भी है कि वह इन सवालों का समाधान करे,” थरूर ने कहा।

उन्होंने जोड़ा कि राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनका गंभीरता से उत्तर दिया जाना चाहिए।
“चुनाव आयोग की जिम्मेदारी सिर्फ देश के प्रति नहीं है, बल्कि यह उसकी अपनी जवाबदेही भी है कि चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कायम रहे,” उन्होंने स्पष्ट किया।

लोकतंत्र की कीमत पर संदेह नहीं
थरूर ने कहा कि भारत का लोकतंत्र अत्यंत मूल्यवान है और इसे संदेह के कारण खतरे में नहीं डाला जा सकता।
“यह चिंता का विषय है कि कहीं दोबारा मतदान तो नहीं हुआ, एक से अधिक पते तो नहीं हैं या फर्जी वोट तो नहीं पड़े। अगर लोगों के मन में ऐसे संदेह हैं, तो उनका समाधान होना जरूरी है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि इन सवालों के जवाब मौजूद हो सकते हैं, लेकिन वे विश्वसनीय तरीके से दिए जाने चाहिए ताकि देश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का भ्रम न रहे।

राहुल गांधी का नेतृत्व और विपक्ष का रुख
इस मार्च में राहुल गांधी के साथ कई विपक्षी दलों के सांसद और नेता मौजूद थे। विपक्ष का आरोप है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची में हेरफेर के जरिए चुनावी धांधली की जा रही है। राहुल गांधी ने हाल ही में बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का हवाला देते हुए 1,00,250 वोट चोरी का दावा किया था।

चुनाव आयोग से अपील
थरूर ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को विपक्ष की चिंताओं को सुनना चाहिए और उनका पारदर्शी समाधान करना चाहिए।
“अगर यह कदम उठाया जाता है, तो आयोग की साख न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत होगी,” उन्होंने कहा।

 

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