समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 16 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस के दिन समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए विधायक पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह फैसला ठीक उस समय लिया गया जब उन्होंने विधानसभा की बहस के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की सार्वजनिक सराहना की।
यह सपा द्वारा पिछले दो महीनों में चौथे बागी विधायक के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई है।
योगी की नीतियों की तारीफ़ और सपा का सख़्त रुख
कौशांबी के चायल से विधायक पूजा पाल ने विधानसभा में “विजन डॉक्यूमेंट 2047” पर चल रही 24 घंटे की बहस के दौरान कहा:
“मेरे पति की हत्या अतीक अहमद जैसे अपराधियों ने की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरी बात सुनी और ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत ऐसे अपराधियों को मिट्टी में मिलाया। आज पूरा प्रदेश उन पर विश्वास की नज़र से देखता है।”
उनके इस बयान के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत पत्र जारी कर उन्हें “गंभीर अनुशासनहीनता” और “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में बर्खास्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि पूजा पाल की गतिविधियों से पार्टी को नुकसान हुआ है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित किया जाता है
बागी विधायकों पर लगातार कार्रवाई
सपा ने इससे पहले अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और मनोज पांडे को फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने के आरोप में निष्कासित किया था। उस समय जातीय समीकरणों को देखते हुए पूजा पाल को राहत मिली थी, लेकिन इस बार पार्टी ने कोई ढिलाई नहीं दिखाई।
पूजा पाल की राजनीतिक यात्रा
दिवंगत बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल का राजनीतिक करियर संघर्षों से भरा रहा है।
- 2005 में पति की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया।
- बसपा से चुनाव लड़ते हुए कई बार विधानसभा पहुँचीं।
- 2019 में मायावती से मतभेद के बाद सपा में शामिल हुईं और 2022 में चायल सीट से विधायक बनीं।
यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने सपा लाइन से हटकर बयान दिया हो। फरवरी 2024 में उन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन किया था, जिस पर पार्टी के भीतर असंतोष हुआ था।
सपा का बचाव और भाजपा का हमला
वरिष्ठ सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि पूजा पाल के बयान लगातार पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पाल “भाजपा के दबाव” या “डर” में यह सब कर रही थीं।
वहीं भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सपा पर पलटवार करते हुए कहा:
“पूरे सदन ने देखा कि सपा महिला विरोधी है। केवल योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ करने पर पूजा पाल को निष्कासित करना उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।”
पूजा पाल का जवाब
निष्कासन के बाद भी पूजा पाल अपने बयान पर अडिग रहीं। उन्होंने कहा:
“मैं पहले एक पत्नी हूँ जिसने अपने पति को खोया है। योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों को सज़ा दिलाई, तो धन्यवाद देना अपराध नहीं है। मैं इलाहाबाद की उन महिलाओं की आवाज़ हूँ जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।”
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने सख़्ती दिखाने के लिए निष्कासन किया, लेकिन उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था।
पूजा पाल का निष्कासन सिर्फ़ एक विधायक का राजनीतिक भविष्य तय नहीं करता, बल्कि यह सपा में अनुशासन, जातीय समीकरणों और भाजपा-सपा टकराव की नई बिसात भी बिछाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पूजा पाल भाजपा के करीब जाती हैं या स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता अपनाती हैं।
Comments are closed.