मोदी का मास्टरस्ट्रोक: बोइंग डील रोकी, अमेरिका को रूस-चीन संग रणनीतिक संदेश

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 18 अगस्त: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जारी व्यापारिक तनातनी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे रणनीतिक मोर्चे पर भारत का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

अमेरिका की चेतावनियों और भारी टैरिफ के बावजूद भारत ने साफ कर दिया कि वह राष्ट्रहित से कोई समझौता नहीं करेगा। इसी के तहत भारत ने अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग (Boeing) को दिया गया करीब ₹31,000 करोड़ का यात्री विमानों का ऑर्डर फिलहाल रोक दिया है। यह कदम वॉशिंगटन को एक कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

रूस से तेल खरीद और अमेरिकी दबाव

ट्रंप प्रशासन भारत पर लंबे समय से दबाव बना रहा था कि वह रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद करे। अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यदि भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा, तो उस पर 50% तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा।

लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और रूस से तेल खरीदना राष्ट्रीय हित में जारी रहेगा। यह संदेश अमेरिका को साफ तौर पर बता रहा है कि भारत किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

बोइंग डील पर बड़ा ब्रेक

भारत द्वारा बोइंग के साथ की गई लगभग ₹31,000 करोड़ की यात्री विमान डील को होल्ड पर रखना अमेरिका के लिए बड़ा आर्थिक झटका है।

यह सौदा भारत की प्रमुख एयरलाइनों द्वारा किया गया था, लेकिन अब इसके रुकने से न केवल बोइंग को बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी डील पर ब्रेक लगने से अमेरिका में रोजगार और रक्षा-व्यापार संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा।

रूस और चीन का समर्थन

भारत के इस साहसिक कदम को रूस और चीन का समर्थन भी मिला है।

  • रूस ने कहा कि भारत को यह अधिकार है कि वह किससे व्यापार करे।
  • चीन ने ट्रंप की चेतावनियों को अनुचित बताते हुए भारत के फैसले का समर्थन किया।

दोनों देशों ने अमेरिका की धमकियों को “अंतरराष्ट्रीय वैधता से रहित” बताते हुए भारत के स्वतंत्र निर्णयों का समर्थन किया है।

त्रिकोणीय रणनीतिक समीकरण: भारत-रूस-चीन

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में बीजिंग जाकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की संभावना भी बढ़ गई है। इसके अलावा चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी इसी महीने भारत आ सकते हैं।

तीनों महाशक्तियों — भारत, रूस और चीन — की यह बढ़ती नजदीकियां वॉशिंगटन के लिए कूटनीतिक चिंता का सबब बन रही हैं। वैश्विक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं और भारत एक निर्णायक शक्ति संतुलनकर्ता के रूप में उभरता दिख रहा है।

भारत ने बोइंग डील रोककर और रूस से तेल खरीद जारी रखकर यह संदेश दिया है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र और राष्ट्रहित केंद्रित है। आने वाले दिनों में भारत, रूस और चीन की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता निश्चित रूप से वैश्विक राजनीति में नए समीकरण गढ़ेगी और अमेरिका को रणनीतिक रूप से चुनौती देगी।

 

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