समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 30 अगस्त: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को राज्य में घुसपैठ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने अप्रवासी निष्कासन अधिनियम के तहत अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। इस अधिनियम के प्रावधान 1971 के बाद राज्य में आए विदेशी नागरिकों को निष्कासित करने का अधिकार देते हैं।
एक प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान दो स्तरों पर चल रहा है। पहला, उन लोगों के खिलाफ जो 1971 के बाद से अवैध रूप से असम में रह रहे हैं। दूसरा, जो वर्तमान में सीमा पार करने का प्रयास कर रहे हैं। सरमा ने बताया कि हाल ही में 33 घुसपैठियों को राज्य से वापस भेजा गया है।
केंद्र का समर्थन और अमित शाह का रुख
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि केंद्र सरकार इस अभियान में असम सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान का उल्लेख करते हुए कहा –
“जब केंद्रीय गृह मंत्री ने हमारे निष्कासन उपायों पर जोर दिया, तो यह स्पष्ट हो गया कि भारत सरकार हर स्तर पर असम को सहयोग देगी। हमारा लक्ष्य है कि राज्य की एक भी इंच जमीन अतिक्रमण के अधीन न रहे।”
राजनीतिक निहितार्थ और विपक्ष पर हमला
राजनीतिक संदर्भ में सरमा ने अमित शाह की उन टिप्पणियों को भी दोहराया, जिनमें कुछ नेताओं पर पाकिस्तान से संबंध होने का आरोप लगाया गया था। सरमा ने कहा –
“यदि संसद में कोई गलत बयान दिया जाता है तो विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। इससे यह साबित होता है कि जो कहा गया उसमें गंभीरता और सच्चाई है।”
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी और एनडीए गठबंधन की जमीनी पकड़ बेहद मजबूत है।
भाजपा-एजीपी गठबंधन की जमीनी मजबूती
सरमा ने भाजपा और असम गण परिषद (एजीपी) की हालिया संयुक्त पंचायत बैठक का जिक्र करते हुए दावा किया कि गठबंधन का संगठनात्मक ढांचा हर बूथ स्तर पर मजबूत है।
“हमारे कार्यकर्ता हर वार्ड में तैयार हैं। नवंबर में भाजपा और एजीपी का संयुक्त बूथ सम्मेलन आयोजित होगा। हमने पहले ही प्रत्येक बूथ पर 21 कार्यकर्ताओं की टीम तैयार कर ली है। यह दिखाता है कि एनडीए की एकता जमीनी स्तर पर कितनी मजबूत है।”
असम में घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया बयान ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। केंद्र सरकार के समर्थन और बीजेपी-एजीपी गठबंधन की जमीनी तैयारी के साथ, आने वाले महीनों में यह अभियान न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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