यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे, दिल्लीवासियों को मिली राहत, बाढ़ प्रभावितों की मुश्किलें जारी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 सितंबर: दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर यह है कि यमुना का जलस्तर आखिरकार खतरे के निशान से नीचे आ गया है। रविवार शाम तक यमुना का स्तर 205.38 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 205.33 मीटर है। हर घंटे पानी करीब 2 सेंटीमीटर की रफ्तार से घट रहा है। हथिनीकुंड बैराज से प्रति घंटे 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन दिल्ली से निकासी इससे करीब चार गुना अधिक हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले एक-दो दिनों में बाढ़ प्रभावित इलाके सामान्य होने लगेंगे।

हालांकि, राहत की इस खबर के बीच बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानियां अभी भी खत्म नहीं हुई हैं। यमुना बाजार, मॉनेस्ट्री मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में घर अब भी गाद में दबे हुए हैं। घरों के भीतर तीन से चार फुट तक गाद भरी हुई है। लोग अपने घरों से बचा हुआ सामान निकालने की कोशिश में जुटे हैं।

इस सीजन में यमुना का जलस्तर 4 अगस्त को 207.48 मीटर तक पहुंच गया था, जिससे स्थिति बिगड़ी थी। लेकिन इस बार प्रशासन की बेहतर तैयारियों के कारण 7 अगस्त तक हालात नियंत्रित हो गए थे।

आईटीओ और रिंग रोड पर नियंत्रण

दिल्ली की सबसे बड़ी चुनौती हर साल आईटीओ और रिंग रोड पर जलभराव रहती है। पिछली बार 2023 की बाढ़ में आईटीओ से लेकर राजघाट-सराय काले खां फ्लाईओवर तक सड़कें तालाब बन गई थीं और ट्रैफिक घंटों ठप हो गया था। इस बार स्थिति अलग रही। दो महीने पहले आईटीओ पर सीवेज सिस्टम को नए सिरे से बदला गया, जिससे ओवरफ्लो की समस्या नहीं हुई। रिंग रोड पर 20 घंटे जलभराव रहा, लेकिन पंपों की मदद से पानी जल्द निकाल लिया गया और ट्रैफिक नियमित रूप से चलता रहा।

प्रशासन की तैयारी और राहत प्रयास

दिल्ली सरकार और प्रशासन ने इस बार बाढ़ से निपटने के लिए कई कदम पहले ही उठाए थे। सभी बैराजों के गेट खोले गए थे, जिससे पानी के बहाव में कोई अवरोध नहीं आया। पिछली बार आईटीओ बैराज के बंद गेट और निर्माण सामग्री ने जलभराव को बढ़ाया था, लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह संभाली गई।

हालांकि, बाढ़ प्रभावित लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। यमुना खादर निवासी सुमित कुमार ने बताया कि बाढ़ में उनका सब कुछ बह गया और जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और बच्चों की मार्कशीट भी पानी में डूब गई। पुराना उस्मानपुर निवासी लवकुश ने कहा कि राहत शिविरों में खाने-पीने और चिकित्सा सुविधाओं की कमी बहुत कठिनाइयाँ पैदा कर रही है।

राहत शिविरों में मच्छरों की भरमार ने स्थिति और खराब कर दी है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने छिड़काव कराया, लेकिन पीड़ित इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण में बेहतर काम किया, लेकिन अब असल चुनौती बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास की है। जिन लोगों ने घर और सामान खोया है, उन्हें फिर से खड़ा होना होगा। उनके पास न तो रहने की स्थायी व्यवस्था है और न ही जरूरी दस्तावेज, जिनसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

यमुना का जलस्तर घटने के बाद दिल्लीवासियों ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन बाढ़ प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अभी भी जारी हैं। प्रशासन को अब बाढ़ के बाद के पुनर्वास और राहत कार्यों पर पूरी ताकत लगानी होगी। वरना जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ की मार पीड़ितों के लिए लंबे समय तक बनी रहेगी।

 

Comments are closed.