समग्र समाचार सेवा
दुबई/नई दिल्ली, 16 सितंबर: एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले के बाद अब ‘हैंडशेक विवाद’ सुर्खियों में है। मैच खत्म होने के बाद जब पाकिस्तानी टीम भारतीय खिलाड़ियों से हाथ मिलाने आई, तो उन्हें अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा। दरअसल, भारतीय बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे सीधे ड्रेसिंग रूम में चले गए और दरवाजा बंद कर दिया गया। इस दौरान पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा और उनकी टीम को असहज होकर इंतजार करना पड़ा।
टॉस के समय भी यह ठंडापन साफ नज़र आया था, जब दोनों कप्तानों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाने से परहेज़ किया और सीधे अपने-अपने रास्ते चले गए।
भारत की जीत और श्रद्धांजलि
इस मैच में भारत ने पाकिस्तान पर शानदार जीत दर्ज की। जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इस जीत को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को समर्पित किया। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी।
हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ वर्गों ने पाकिस्तान के साथ खेलने का विरोध किया था, लेकिन भारतीय टीम ने मैदान पर उतरकर न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि पारंपरिक हैंडशेक छोड़कर एक कड़ा संदेश भी दिया।
क्या भारत को मिलेगी सजा?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत को इस रवैये के लिए सजा मिलेगी। क्रिकेट के MCC कानून के मुताबिक, “क्रिकेट की आत्मा में विपक्ष का सम्मान करना ज़रूरी है। मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ियों और अंपायरों का धन्यवाद करना चाहिए, चाहे परिणाम कुछ भी हो।”
यानी हैंडशेक न करना खेल भावना के खिलाफ माना जा सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि आईसीसी इस घटना पर संज्ञान ले सकती है, हालांकि परिस्थितियों को देखते हुए भारत के कदम को “राजनीतिक और भावनात्मक” संदर्भ में भी समझा जा सकता है।
क्रिकेट की भावना और बहस
MCC के नियमों में साफ कहा गया है कि क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो “नेतृत्व, दोस्ती और टीमवर्क को बढ़ावा देता है। यह अलग-अलग राष्ट्रीयताओं, संस्कृतियों और धर्मों के लोगों को जोड़ता है, बशर्ते इसे क्रिकेट की भावना में खेला जाए।”
भारत के इस कदम ने जहां कई प्रशंसकों का दिल जीता है, वहीं कुछ विशेषज्ञों ने इसे खेल भावना के विपरीत भी करार दिया है। यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।
भारत की जीत ने जहां पूरे देश में जश्न का माहौल बनाया, वहीं हैंडशेक विवाद ने इस रोमांचक मुकाबले को नए राजनीतिक और खेलीय आयाम दे दिए हैं। अब देखना होगा कि आईसीसी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या भारत को किसी सज़ा का सामना करना पड़ेगा।
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