समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली/पुणे, 24 सितंबर: पुणे की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सावरकर परिवार के सदस्य सत्यकी सावरकर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने गांधी को एक कथित मानहानिकारक वीडियो हटाने से रोकने और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने की मांग की थी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे ने अपने आदेश में कहा कि इस चरण पर आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता द्वारा अदालत में प्रस्तुत की गई सीडी को ट्रायल के दौरान साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
याचिका में क्या थी मांग
सत्यकी सावरकर ने अपने वकील संग्राम कोल्हटकर के जरिए दायर आवेदन में विश्रामबाग पुलिस थाने से जांच रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही यह भी आग्रह किया था कि अदालत राहुल गांधी को आदेश दे कि वह यूट्यूब पर डाले गए उस वीडियो को न हटाएं, जिसे कथित तौर पर मानहानिकारक बताया जा रहा है।
पुलिस ने मई 2024 में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें यूट्यूब से गांधी के अकाउंट से जुड़े आईपी एड्रेस, चैनल प्रोफाइल और ईमेल आईडी की जानकारी मांगी गई थी। हालांकि इसके बाद कोई और रिपोर्ट अदालत में जमा नहीं की गई।
गांधी के वकील की दलील
राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता मिलिंद पवार ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि धारा 202 के तहत की गई प्रारंभिक जांच के बाद अदालत ने मामले का संज्ञान ले लिया है, इसलिए बार-बार नई पुलिस रिपोर्ट मंगाने का प्रावधान नहीं है।
पवार ने यह भी दलील दी कि मामला आपराधिक प्रकृति का है, न कि सिविल, इसलिए अदालत गांधी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित नहीं कर सकती। वीडियो हटाने से रोकने का आदेश अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
अदालत का स्पष्ट आदेश
मजिस्ट्रेट शिंदे ने पवार की दलीलों से सहमति जताई और कहा कि धारा 202 की रिपोर्ट का उद्देश्य केवल यह तय करना था कि प्रक्रिया शुरू की जाए या नहीं। रिपोर्ट जमा हो जाने के बाद जांच समाप्त मानी जाती है। अब शिकायतकर्ता को अपने साक्ष्यों के आधार पर अदालत में मानहानि के आरोप साबित करने होंगे।
मामला क्या है?
यह मामला उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने कथित तौर पर यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान सावरकर परिवार को लेकर टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता ने इसे मानहानिकारक बताया है। अब मामला ट्रायल के अगले चरण में जाएगा, जहां दोनों पक्ष सबूत और गवाह पेश करेंगे।
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