समग्र समाचार सेवा
कोच्चि, 20 अक्टूबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को INS विक्रांत पर भारतीय नौसेना के जवानों के साथ दिवाली का पर्व मनाया, जिसे उन्होंने अपनी “सबसे विशेष दिवाली” बताया। यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने देश के स्वदेशी विमानवाहक पोत पर सशस्त्र बलों के साथ त्योहार मनाया।
मोदी ने कहा, “मेरी दिवाली खास रही क्योंकि यह आप सबके बीच बिताने का अवसर मिला। कुछ महीने पहले ही हमने देखा कि कैसे ‘विक्रांत’ नाम ने पाकिस्तान के अंदर डर की लहरें पैदा कर दीं। यह नाम ही दुश्मनों के हौसले पस्त कर देता है। यही है INS विक्रांत की ताकत।”
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi says, "… Just a few months ago, we witnessed how the very name Vikrant sent waves of fear across Pakistan. Such is its might — a name that shatters the enemy’s courage even before the battle begins. This is the power of INS Vikrant… On… pic.twitter.com/TL03Z9CFdg
— ANI (@ANI) October 20, 2025
“लौहपोत नहीं, जीवंत शक्ति है विक्रांत”
प्रधानमंत्री ने नौसेना कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने INS विक्रांत की तकनीकी क्षमता और जवानों की बहादुरी दोनों को करीब से देखा।
उन्होंने कहा, “ये विशाल जहाज़, ये तेज़ रफ्तार विमान और गहराई में जाने वाली पनडुब्बियाँ — इनकी असली शक्ति लोहे में नहीं, बल्कि उन वीरों में है जो इन्हें संचालित करते हैं। ये पोत जब आपके साहस से जुड़ते हैं, तब यह ‘जीवंत शक्ति’ बन जाते हैं।”
मोदी ने आगे कहा, “मैं कल से आप सबके बीच हूँ। हर पल कुछ नया सीखा। जब मैं दिल्ली से निकला था, तो सोचा था कि इस अनुभव को जी लूँगा, परंतु आपकी साधना और समर्पण इतना महान है कि उसे जी पाना असंभव है, सिर्फ समझा जा सकता है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख और तीनों सेनाओं को नमन
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी ज़िक्र किया, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त कौशल ने पाकिस्तान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया था।
उन्होंने कहा, “भारतीय नौसेना की दहशत, वायुसेना की कुशलता और थलसेना की वीरता ने उस समय इतिहास रचा। आज INS विक्रांत के इस पवित्र और वीर स्थल से मैं तीनों सेनाओं के वीरों को नमन करता हूँ।”
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य
मोदी ने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों का वैश्विक निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “‘ब्रहमोस’ और ‘आकाश’ मिसाइलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमता साबित की थी। आज कई देश ब्रहमोस खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में भारत का रक्षा निर्यात 30 गुना बढ़ा है, और हमारा लक्ष्य है कि भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल हो।”
हर साल सैनिकों के बीच दिवाली
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद से हर साल दिवाली सैनिकों के साथ सीमाओं पर या रणनीतिक स्थानों पर मनाई है।
उन्होंने पहली बार दिवाली सियाचिन ग्लेशियर पर जवानों के साथ मनाई थी, जबकि 2015 में उन्होंने पंजाब के डोगराई वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए त्योहार मनाया था।
इस बार उनका INS विक्रांत दौरा नए भारत की सामरिक और स्वदेशी शक्ति का प्रतीक माना जा रहा है।
‘स्वदेशी अपनाओ’ की अपील
दिवाली की शुभकामनाएँ देते हुए मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी करने की अपील भी की। उन्होंने कहा,
“आइए, इस त्योहार के मौसम में 140 करोड़ भारतीयों की मेहनत, रचनात्मकता और नवाचार का जश्न मनाएँ। गर्व से कहें – यह स्वदेशी है!”
उन्होंने नागरिकों से सोशल मीडिया पर अपने खरीदे हुए भारतीय उत्पादों की तस्वीरें साझा करने का भी आग्रह किया ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हों।
INS विक्रांत पर जवानों के साथ दिवाली मनाकर प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल देश की रक्षा क्षमताओं का सम्मान किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत की ताकत उसके सैनिकों के समर्पण और स्वदेशी सामर्थ्य में निहित है।
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