शिवराज सिंह चौहान 10 नवंबर को ओडिशा दौरे पर, ‘मंडिया दिवस’ में करेंगे भागीदारी
केंद्रीय कृषि मंत्री किसानों से करेंगे संवाद, प्राकृतिक खेती और दलहन मिशन पर होगी रणनीतिक बैठक
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 10 नवंबर को एकदिवसीय ओडिशा दौरे पर रहेंगे।
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‘मंडिया दिवस’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में करेंगे शिरकत।
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पीएम धन धान्य कृषि योजना, दलहन मिशन और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग पर होगी चर्चा।
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भुवनेश्वर और कटक में किसानों से मिलेंगे और खेतों का दौरा करेंगे।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,9 नवंबर: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार, 10 नवंबर को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य में आयोजित होने वाले ‘मंडिया दिवस’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और किसानों से सीधे संवाद करेंगे।
सुबह पटना से रवाना होकर वे 11 बजे भुवनेश्वर पहुंचेंगे, जहां वे लोक सेवा भवन स्थित सम्मेलन केंद्र में आयोजित ‘मंडिया दिवस’ के उद्घाटन सत्र में भाग लेंगे। इस मौके पर वे देशभर में मिलेट (श्री अन्न) के उत्पादन, प्रसंस्करण और उपभोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पहलों को रेखांकित करेंगे।
कार्यक्रम के बाद मंत्री चौहान कटक जिले के सदर क्षेत्र में किसानों से सीधे संवाद करेंगे और केंद्र की कृषि योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। वे किसानों के अनुभव और चुनौतियां सुनेंगे ताकि भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया में उनका फीडबैक शामिल किया जा सके।
दोपहर में मंत्री चौहान आईसीएआर – सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI), कटक में एक संयुक्त रणनीतिक बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में पीएम धन धान्य कृषि योजना, आत्मनिर्भर दलहन मिशन और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग पर विस्तृत चर्चा होगी।
इस बैठक में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईसीएआर वैज्ञानिक और ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार करना है।
केंद्रीय मंत्री का यह दौरा ओडिशा में टिकाऊ और आत्मनिर्भर कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चौहान ने कहा है कि “भारत का भविष्य उसके किसानों के खेतों में बसता है” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार खेती को लाभदायक, पर्यावरण अनुकूल और तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उनकी यह यात्रा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए ग्रामीण विकास को गति देने की दिशा में एक अहम कदम है।
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