रायपुर में 60वीं डीजीपी–आईजीपी सम्मेलन का उद्घाटन

मोदी सरकार के नेतृत्व में सम्मेलन आंतरिक सुरक्षा संबंधी समाधान, चुनौतियों और नीतियों का प्रभावी मंच बनकर उभरा

  • सात वर्षों में 586 सुदृढ़ पुलिस थानों के निर्माण से सुरक्षा ढांचा और मजबूत
  • नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 11 रह गई
  • विध्वंसक गतिविधियों, उग्रवाद और मादक पदार्थ तस्करी पर केंद्र–राज्य मिलकर कर रहे हैं प्रहार
  • नये आपराधिक कानून लागू होने के बाद भारत की पुलिस व्यवस्था विश्व में सर्वाधिक आधुनिक होगी

समग्र समाचार सेवा
रायपुर, 28 नवंबर:केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तीन दिवसीय 60वें महानिदेशक–पुलिस / महानिरीक्षक–पुलिस (डीजीपी–आईजीपी) सम्मेलन का उद्घाटन किया।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं रहा, बल्कि समस्याओं के समाधान, चुनौतियों की पहचान, नई रणनीतियों और नीति निर्धारण तक आंतरिक सुरक्षा के व्यापक समाधान का प्रमुख स्तंभ बन चुका है।

अमित शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले सात वर्षों में 586 सुदृढ़ (फ़ोर्टिफ़ाइड) पुलिस थाने बनाकर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद बनाया है। इसका परिणाम है कि सन 2014 में 126 नक्सल प्रभावित जिले थे, जो अब सिमटकर मात्र 11 रह गए हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि अगले डीजीपी–आईजीपी सम्मेलन से पहले भारत पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद, उत्तर–पूर्व क्षेत्र और जम्मू–कश्मीर   ये तीनों क्षेत्र पिछले चार दशकों से देश के लिए सबसे बड़े संकट रहे हैं, परंतु मोदी सरकार ने इनके स्थायी समाधान की दिशा में निर्णायक कदम उठाए, और इन क्षेत्रों में सामान्य स्थिति तेजी से बहाल हो रही है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और गैरकानूनी गतिविधियाँ (निरोध) अधिनियम को और सख्त बनाया है।
साथ ही, नए आपराधिक संहिताओं, मादक पदार्थ नियंत्रण कानूनों और भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध प्रावधानों से कानून–व्यवस्था को अत्यधिक मजबूती मिली है।
अमित शाह ने कहा कि नयी दण्ड संहिताओं के पूर्णतः लागू होने के बाद भारत की पुलिस व्यवस्था विश्व की सबसे आधुनिक और सक्षम व्यवस्था बन जाएगी।

उन्होंने कट्टरता, उग्रवाद और मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध केंद्र सरकार की सख्त नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र–राज्य की साझा कार्रवाई के तहत लोकप्रिय मोर्चा (पीएफ़आई) पर प्रतिबंध के बाद, पूरे देश में इसके ठिकानों पर छापेमारी और गिरफ्तारियाँ की गईं,  जो बेहतरीन समन्वय का उदाहरण है।

गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियाँ सूचना की शुद्धता, उद्देश्य की स्पष्टता और कार्रवाई की सामंजस्यपूर्ण एकता के तीन सिद्धांतों पर कार्यरत हैं, जिससे देश में उग्रवाद और मादक पदार्थ व्यापार पर निर्णायक प्रहार हो रहा है।

उन्होंने दोहराया कि मादक पदार्थों और संगठित अपराध पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है कि देश में इनके लिए कोई स्थान न बचे।
उन्होंने राज्यों की पुलिस से आग्रह किया कि वे नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो के साथ संगठित होकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मादक पदार्थ गिरोहों को समाप्त करें और उनके सरगनाओं को जेल भेजें।

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