उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ‘महामना वांग्मय’ की अंतिम श्रृंखला का किया विमोचन

महामना मालवीय ने प्राचीन मूल्यों और आधुनिक भारत के बीच सेतु का कार्य किया: उपराष्ट्रपति

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 25 दिसंबर: उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित रचनाओं की अंतिम श्रृंखला ‘महामना वांग्मय’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने महामना मालवीय को महान राष्ट्रवादी, शिक्षाविद, समाज सुधारक, पत्रकार और भारतीय संस्कृति का प्रतिष्ठित विद्वान बताया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामना मालवीय एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्तित्व थे, जिनका मानना था कि भारत का भविष्य अपने अतीत को नकारने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में निहित है। उन्होंने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच सेतु का कार्य किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पंडित मालवीय की वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता उनके संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें प्राचीन भारतीय परंपराओं और आधुनिक ज्ञान का समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने औपनिवेशिक काल में शिक्षा को राष्ट्रीय जागरण का सशक्त माध्यम मानते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना को उनके शैक्षिक दर्शन का जीवंत प्रमाण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि महामना मालवीय का आत्मनिर्भर, सशक्त और प्रबुद्ध भारत का स्वप्न आज आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और वर्ष 2047 तक विकसित भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन पहलों को महामना मालवीय की स्थायी विरासत से जोड़ते हुए उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामना मालवीय का समावेशी, मूल्य-आधारित और कौशल-उन्मुख शिक्षा पर बल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी दृढ़ता से दिखाई देता है।

‘महामना वांग्मय’ को केवल लेखों और भाषणों का संकलन न बताते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए को दर्शाता है और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक महत्त्वपूर्ण खाका प्रस्तुत करता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, विद्वानों और युवा शोधकर्ताओं से इन ग्रंथों से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की प्रमुख बातें
  • ‘महामना वांग्मय’ की अंतिम श्रृंखला में 12 खंड शामिल
  • लगभग 3,500 पृष्ठों में पंडित मालवीय के लेखन और भाषणों का संकलन
  • प्रकाशन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा
  • पहली श्रृंखला का विमोचन वर्ष 2023 में किया गया था

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय, महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष श्री हरि शंकर सिंह तथा प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैंथोला उपस्थित रहे।

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