राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एआई प्रमाणपत्र प्रदान किए

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने समावेशी और भविष्य-तैयार एआई इकोसिस्टम का दिया आह्वान

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 02जनवरी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में विद्यार्थियों और सांसदों सहित विभिन्न शिक्षार्थियों को एसओएआर (एआई तत्परता के लिए कौशल विकास) प्रमाणपत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने समावेशी, नैतिक और भविष्य के लिए तैयार कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्टम के निर्माण का आह्वान करते हुए कहा कि एआई भारत की विकास यात्रा का एक प्रमुख चालक बनने जा रही है।

राष्ट्रपति ने ‘SkillTheNation Challenge’ की भी औपचारिक घोषणा की और डिजिटल रूप से दक्ष, आत्मनिर्भर तथा भविष्य-तैयार भारत के निर्माण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराया।

छात्रों और सांसदों को मिला एआई प्रमाणन

समारोह के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के पीएम श्री स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों के 17 चयनित छात्रों के साथ-साथ देशभर के 15 सांसदों को एआई पाठ्यक्रम के प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

इंडियाएआई शिखर सम्मेलन में आगे बढ़ेगा यह अभियान

राष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल आगामी इंडियाएआई शिखर सम्मेलन में और अधिक गति पकड़ेगी, जहां भारत वैश्विक एआई भविष्य को आकार देने के अपने विजन, तैयारी और सामूहिक संकल्प को मजबूती से प्रस्तुत करेगा।


ओडिशा में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरांगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि यह केंद्र उच्च शिक्षा, परामर्श, शिक्षार्थी सेवाओं और परीक्षाओं तक पहुंच को मजबूत करेगा। इससे विशेष रूप से ग्रामीण, जनजातीय, महिला और कामकाजी शिक्षार्थियों को लाभ मिलेगा तथा रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

“एआई अर्थव्यवस्था, रोजगार और उत्पादकता को नई दिशा देगी”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आने वाले दशक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के सकल घरेलू उत्पाद, रोजगार सृजन और समग्र उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, एआई इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल भारत के एआई प्रतिभा पूल को मजबूत करेंगे।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने और प्रौद्योगिकी-आधारित समावेशी विकास की दिशा में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्रियों ने भी एआई-सशक्त भारत पर दिया जोर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई पीढ़ी को एआई-सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल अवसंरचना में अपनी क्षमता सिद्ध की है और अब अगला कदम “सभी के लिए एआई” को शिक्षा और शासन से जोड़ना है।
वहीं कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि एआई अब भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 में शुरू किए गए एसओएआर निःशुल्क एआई पाठ्यक्रम में अब तक 1.59 लाख से अधिक नामांकन हो चुके हैं, जो भारत में एआई सीखने की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

एआई सत्र और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने गूगल के सहयोग से राष्ट्रपति भवन में एआई पर एक विशेष इंटरैक्टिव लर्निंग सत्र का आयोजन भी किया। इस अवसर पर शिक्षा और कौशल मंत्रालयों के कई वरिष्ठ अधिकारी तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति भी उपस्थित रहीं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.