देशी पशुधन किसानों की समृद्धि की कुंजी: शिवराज सिंह चौहान

देसी मवेशी और भैंस किसानों की आय सुरक्षा का आधार: केंद्रीय मंत्री

  • नई दिल्ली में पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार समारोह आयोजित
  • शिवराज सिंह चौहान ने देसी पशुधन को कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया
  • 2008 से अब तक 242 स्वदेशी पशु नस्लों का पंजीकरण
  • नस्ल संरक्षण को नीति से आगे जन आंदोलन बनाने पर जोर

 

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 15 जनवरी: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे पशु भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इनका संरक्षण किसानों की समृद्धि से सीधे तौर पर जुड़ा है।

देसी पशुधन का पारिस्थितिक महत्व

नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में आयोजित पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का पशुओं से संबंध केवल आर्थिक या पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि इस संतुलन में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर पर्यावरण और धरती की भलाई पर पड़ता है।

जन आंदोलन बने संरक्षण अभियान

केंद्रीय मंत्री ने 2019 में शुरू की गई राष्ट्रीय पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि देसी पशु नस्लों के संरक्षण का कार्य केवल नीति और सम्मेलन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे गांवों और खेतों तक पहुंचाकर जन आंदोलन का रूप देना होगा।

उन्होंने वैज्ञानिकों, संस्थानों और किसान समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कोशिशें जैव विविधता की रक्षा, ग्रामीण आजीविका और सतत खेती के भविष्य को सुरक्षित कर रही हैं।

2047 तक सभी नस्लों का पंजीकरण लक्ष्य

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ हिमांशु पाठक ने कहा कि ‘विकसित भारत – पशुधन’ का विज़न संरक्षण के साथ जिम्मेदार संसाधन उपयोग पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि 2008 से अब तक 242 स्वदेशी पशु नस्लों का पंजीकरण किया जा चुका है और 2047 तक सभी देसी नस्लों के 100 प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

नस्ल पंजीकरण से किसानों को लाभ

डॉ. पाठक ने कहा कि नस्ल पंजीकरण केवल संरक्षण नहीं, बल्कि जैविक संसाधनों पर संप्रभु अधिकार, किसानों के लिए लाभ-साझाकरण और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता जताते हुए सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

नस्ल संरक्षण पुरस्कार 2025

समारोह में स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए।
व्यक्तिगत श्रेणी में लुइट भैंस संरक्षण के लिए जीतुल बुरागोहेन को प्रथम पुरस्कार

पुंगनूर मवेशी संरक्षण के लिए कुडाला राम दास को द्वितीय पुरस्कार
संस्थागत श्रेणी में बिनझारपुरी मवेशी प्रमोटर्स एंड प्रोड्यूसर्स सोसाइटी को प्रथम पुरस्कार

पृष्ठभूमि

भारत विश्व के सबसे समृद्ध पशु आनुवंशिक संसाधनों वाले देशों में शामिल है। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 2008 में पशु नस्ल पंजीकरण कार्यक्रम शुरू किया था। 2019 से अब तक 229 स्वदेशी नस्लों को राजपत्र अधिसूचनाओं के माध्यम से कानूनी सुरक्षा दी गई है।

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