राम जन्मभूमि आंदोलन पर पुस्तक विमोचन: राम मंदिर लोकतंत्र की जीत-उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन बोले—राम मंदिर सत्य, धर्म और लोकतंत्र की जीत का प्रतीक

  • राम जन्मभूमि आंदोलन पर आधारित पुस्तक का नई दिल्ली में विमोचन
  • उपराष्ट्रपति ने राम मंदिर को सत्य, धर्म और लोकतंत्र की विजय बताया
  • 2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले को ऐतिहासिक मोड़ करार
  • एएसआई रिपोर्ट और जनभागीदारी की भूमिका पर जोर

 

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 जनवरी: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व सचिव सुरेंद्र कुमार पचौरी की पुस्तक ‘चैलिस ऑफ एम्ब्रोसिया: राम जन्मभूमि–चुनौती और प्रतिक्रिया’ का विमोचन किया।

सदियों के संघर्ष की संतुलित प्रस्तुति

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन पर यह पुस्तक भगवान श्रीराम के जन्मस्थल को पुनः प्राप्त करने के लिए सदियों से चले संघर्ष की सम्पूर्ण और संतुलित कथा प्रस्तुत करती है। उनके अनुसार लेखक ने विषय को विद्वतापूर्ण, संवेदनशील और तथ्यात्मक रूप से रखा है, जिसमें न तो अतिरंजना है और न ही तथ्यात्मक भ्रम।

सभ्यतागत यात्रा का निर्णायक क्षण

राम मंदिर निर्माण को भारत की सभ्यतागत यात्रा का निर्णायक पड़ाव बताते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में आस्था, इतिहास, कानून और लोकतंत्र एक साथ गरिमा के साथ सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन्मस्थल पर बना राम मंदिर अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता रखता है।

श्रीराम भारत की आत्मा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्रीराम भारत की आत्मा और भारतीय धर्म की चेतना हैं। सत्य की हमेशा विजय होती है और धर्म कभी पराजित नहीं होता। उन्होंने महात्मा गांधी की राम राज्य की अवधारणा को न्याय, समानता और मानवीय गरिमा का प्रतीक बताया।

कानूनी प्रक्रिया और लोकतंत्र

राम जन्मभूमि से जुड़े लंबे कानूनी संघर्ष पर बोलते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था होने के बावजूद भूमि विवाद का समाधान केवल साक्ष्यों और विधिसम्मत प्रक्रिया के आधार पर हुआ। यह भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।

2019 का ऐतिहासिक फैसला

उन्होंने 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए कहा कि इस निर्णय ने लाखों भारतीयों के लंबे समय से देखे गए सपनों को साकार किया और राष्ट्रीय आत्म-सम्मान को मजबूती दी।

एएसआई रिपोर्ट और जनभागीदारी

उपराष्ट्रपति ने एएसआई की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि पुरातात्विक प्रमाणों ने न्यायिक निर्णय को दिशा दी। साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनभागीदारी अभियान की सराहना करते हुए बताया कि इसके तहत 3,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि एकत्र की गई।

वैश्विक स्वीकार्यता और नेतृत्व

उन्होंने भगवान श्रीराम की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी आस्था भारत से बाहर कई देशों तक फैली है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए राम मंदिर को परिपक्व लोकतंत्र और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।

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