नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति ने श्री रमण महर्षि को श्रद्धांजलि दी
रमण महर्षि की शिक्षाएं आंतरिक जागरूकता और जिम्मेदार जीवन का मार्ग दिखाती हैं: उपराष्ट्रपति
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नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति ने श्री रमण महर्षि को श्रद्धांजलि दी
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रमण महर्षि के सम्मान में स्मारक सिक्के का विमोचन
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आत्म-विचार और आंतरिक स्वतंत्रता को बताया उनकी शिक्षाओं का मूल
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रमण आश्रम की सामाजिक और सेवा गतिविधियों की सराहना
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 23 जनवरी: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में भगवान श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती के अवसर पर संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने श्री रमण महर्षि के सम्मान में स्मारक सिक्का भी जारी किया।
आधुनिक भारत के महान आध्यात्मिक संत
उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रमण महर्षि आधुनिक भारत के सबसे पूजनीय आध्यात्मिक संतों में से एक थे, जिनका देश की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि अनेक संतों ने त्याग का जीवन जिया, लेकिन रमण महर्षि की विशेषता यह थी कि वे अपने त्याग से भी अनासक्त रहे।
आत्म-विचार का शाश्वत संदेश
उपराष्ट्रपति ने कहा कि रमण महर्षि का जीवन और उनकी शिक्षाएं सत्य, आत्मज्ञान और आंतरिक स्वतंत्रता की भारत की शाश्वत खोज का सार हैं। आत्म-विचार पर उनके प्रमुख उपदेश ने देश-विदेश के आध्यात्मिक साधकों को गहराई से प्रभावित किया है।
सभी जीवों के प्रति करुणा
उन्होंने कहा कि श्री रमण महर्षि की करुणा मनुष्य, पशु और सभी जीवित प्राणियों के प्रति समान रूप से व्याप्त थी, जो भारत की सभ्यतागत चेतना और सार्वभौमिक सद्भाव की परंपरा से मेल खाती है।
रमण आश्रम की भूमिका की सराहना
उपराष्ट्रपति ने तिरुवनमलाई स्थित श्री रमण आश्रम और भारत एवं विदेशों में संचालित रमण केंद्रों की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने आश्रम द्वारा संचालित नि:शुल्क चिकित्सा सेवाओं, जरूरतमंदों को भोजन वितरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आश्रम को आत्मिक शक्ति और शांति का केंद्र माना था।
स्मारक सिक्का एक स्थायी श्रद्धांजलि
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी स्मारक सिक्के को उपयुक्त श्रद्धांजलि बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सिक्का न केवल एक सम्मान है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और आंतरिक जागृति के संदेश की स्थायी स्मृति भी है।
समारोह में श्री रमण आश्रम, तिरुवनमलाई के अध्यक्ष डॉ. वेंकट एस. रामानन, रमणा केंद्र दिल्ली के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के. राममूर्ति (सेवानिवृत्त) सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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