साहित्य दो राष्ट्रों को जोड़ता है – कर्नल विनीत कुमार
कूटनीति, संस्कृति और साहित्य के संगम में भारत मंडपम में हुआ दो पुस्तकों का विमोचन
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 24 जनवरी। वॉलनट पब्लिकेशन की ओर से नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में कर्नल विनीत कुमार की दो नई पुस्तकों के विमोचन के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हॉल-4 के अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम कॉर्नर में आयोजित इस साहित्यिक संध्या में कूटनीति, संस्कृति और साहित्य का प्रभावशाली संगम देखने को मिला।

साहित्यिक संध्या में जुटे राजनयिक, लेखक और पाठक
कार्यक्रम में राजनयिकों, लेखकों, पाठकों और संस्कृति-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। यह आयोजन सीमाओं और विधाओं से परे जाकर कहानी कहने की कला और साहित्य की वैश्विक भूमिका का उत्सव बन गया।
दो पुस्तकों का विमोचन, दो भिन्न लेकिन पूरक दृष्टिकोण
इस अवसर पर कर्नल विनीत कुमार की दो पुस्तकों—‘रुतास मायास, राइसेस इंडियास’ और ‘प्रेम का वायुगतिकी’—का औपचारिक विमोचन किया गया। दोनों कृतियाँ लेखक की साहित्यिक सोच के अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे को संतुलित करने वाले पहलुओं को प्रस्तुत करती हैं। जहाँ पहली पुस्तक यात्रा और भू-राजनीति के माध्यम से प्राचीन सभ्यताओं के संबंधों की पड़ताल करती है, वहीं दूसरी पुस्तक प्रेम और मानवीय रिश्तों के भावनात्मक संसार को केंद्र में रखती है।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति से बढ़ी कार्यक्रम की गरिमा
कार्यक्रम की गरिमा को ग्वाटेमाला के भारत में राजदूत महामहिम उमर लिसैंड्रो कास्टानेडा सोलारेस और नेपाल के फ्रांस में पूर्व राजदूत महामहिम मोहन कृष्ण श्रेष्ठ की उपस्थिति ने और बढ़ाया। दोनों अतिथियों ने अपने संबोधन में साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रों के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बताया।
भारत–ग्वाटेमाला संबंधों में संस्कृति की भूमिका
राजदूत कास्टानेडा सोलारेस ने भारत और ग्वाटेमाला के बीच विकसित हो रहे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान अक्सर औपचारिक कूटनीति से पहले होता है और उसे मज़बूती प्रदान करता है। उन्होंने ‘रुतास मायास, राइसेस इंडियास’ की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक माया सभ्यता और भारतीय सभ्यतागत विरासत के बीच मौजूद गहरे और प्रायः अनदेखे संबंधों को सामने लाती है।
माया और भारतीय सभ्यताओं की साझा विरासत
राजदूत के अनुसार, यह कृति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद सभ्यताएँ आध्यात्मिक प्रतीकों, स्थापत्य कला और दार्शनिक विचारों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ी रह सकती हैं।
भारत–नेपाल संबंधों पर साहित्यिक दृष्टिकोण

राजदूत मोहन कृष्ण श्रेष्ठ ने भारत और नेपाल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा करते हुए साझा इतिहास, खुली सीमाओं और सांस्कृतिक निरंतरता की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संस्मरण ‘थ्री डिकेड्स इन डिप्लोमेसी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य सामूहिक स्मृति को संरक्षित करने और आपसी समझ को गहरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
भावनात्मक सेतु बनाता है साहित्य
उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें राष्ट्रों और समाजों के बीच भावनात्मक सेतु का निर्माण करती हैं, जो केवल औपचारिक कूटनीतिक प्रयासों से संभव नहीं हो पाता।
‘रुतास मायास, राइसेस इंडियास’: एक भू-राजनीतिक यात्रा-वृत्तांत
कर्नल विनीत कुमार की पुस्तक ‘रुतास मायास, राइसेस इंडियास’ (अर्थात माया मार्ग, भारतीय जड़ें) लेखक की मध्य अमेरिका यात्रा पर आधारित एक भू-राजनीतिक यात्रा-वृत्तांत है। यह पुस्तक माया और भारतीय सभ्यताओं के बीच अनुष्ठानों, प्रतीकों, ब्रह्मांडीय अवधारणाओं और विश्व-दृष्टि में मौजूद समानताओं को उजागर करती है।
इतिहास के स्थापित आख्यानों पर पुनर्विचार का निमंत्रण
गहन अवलोकन और ऐतिहासिक चिंतन के माध्यम से यह कृति पाठकों को इतिहास और सांस्कृतिक विकास से जुड़े स्थापित दृष्टिकोणों पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित करती है।
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‘प्रेम का वायुगतिकी’: मानवीय भावनाओं की गहराई
इसके विपरीत, ‘प्रेम का वायुगतिकी’ एक आत्मीय और भावनात्मक साहित्यिक अनुभव प्रदान करती है। यह पुस्तक प्रेम की जटिलताओं, उसके उतार-चढ़ाव और मानवीय संबंधों पर उसके प्रभाव का संवेदनशील विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
सभी आयु वर्ग के पाठकों से जुड़ती कृति
चिंतनशील गद्य के माध्यम से कर्नल विनीत कुमार ने रिश्तों की नाज़ुक संरचना को सहजता और गहराई से उकेरा है, जिससे यह कृति विभिन्न पृष्ठभूमि और आयु वर्ग के पाठकों को प्रभावित करती है।
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सार्थक लेखन को बढ़ावा देने की वॉलनट पब्लिकेशन की प्रतिबद्धता
वॉलनट पब्लिकेशन के प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर गुणवत्ता पूर्ण लेखन और महत्वपूर्ण विचारों को मंच देने के प्रति प्रकाशक की प्रतिबद्धता को दोहराया। विभिन्न विधाओं और भौगोलिक क्षेत्रों के लेखकों को समर्थन देने के लिए जाना जाने वाला यह प्रकाशन समूह वैश्विक पहचान बना चुका है।
साहित्य, संस्कृति और साझा विरासत का उत्सव
भारत मंडपम में आयोजित यह दोहरा पुस्तक-विमोचन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों, साझा विरासत और बदलती दुनिया में साहित्य की चिरस्थायी प्रासंगिकता का उत्सव बनकर उभरा।
कार्यक्रम के बाद भी जारी रहा संवाद
औपचारिक कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी चली बातचीत और विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट कर दिया कि पुस्तकें आज भी संस्कृतियों, राष्ट्रों और दिलों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम बनी हुई हैं।


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