चांदी 1 लाख रुपये गिरी, सोना 33,000 रुपये सस्ता—बुलियन बाजार में ऐतिहासिक गिरावट
रिकॉर्ड तेजी के बाद जोरदार करेक्शन, चांदी 1 लाख और सोना 33 हजार रुपये टूटा
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 31 जनवरी: बुलियन बाजार में शुक्रवार का दिन निवेशकों के लिए किसी ‘ब्लैक फ्राइडे’ से कम नहीं रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) और हाजिर बाजार, दोनों में सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली।एक ही दिन में चांदी 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा टूट गई, जबकि सोना 33,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया। वायदा कारोबार के साथ-साथ घरेलू बाजार में भी कीमतें धड़ाम रहीं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी दबाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं पर जोरदार बिकवाली दिखी।
- सोना (अप्रैल डिलीवरी): 5,480 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर के बाद 11 प्रतिशत से अधिक गिरकर अमेरिकी समयानुसार शाम करीब 6 बजे 4,763 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
- चांदी (मार्च डिलीवरी): 118.34 डॉलर के शिखर से 31 प्रतिशत टूटकर 78.83 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। कारोबार के दौरान यह 74.15 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई थी।
मुनाफावसूली ने बढ़ाया दबाव
बीते कुछ दिनों में सोना और चांदी लगातार ऑल-टाइम हाई बना रहे थे। ऊंचे भाव पर पहुंचते ही निवेशकों ने जोरदार मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर तेज दबाव पड़ा। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार, सोना-चांदी ने सभी फॉर्मेट—मेगा और मिनी कॉन्ट्रैक्ट—में निचले सर्किट स्तर को छुआ। उनका कहना है कि यह ऊपरी स्तरों से आई मजबूत मुनाफावसूली है और घरेलू बाजारों में गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी है।
तेजी के बाद करेक्शन लगभग तय
केडिया एडवायरजरी के मुताबिक, हालिया रैली में कीमती धातुओं की तेजी जरूरत से ज्यादा गर्म हो चुकी थी, ऐसे में करेक्शन तय माना जा रहा था। सोने की तुलना में चांदी का बाजार आकार में छोटा और स्वभाव से ज्यादा अस्थिर होता है, इसलिए बिकवाली तेज होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा दिखती है। जैसे ही सोना रिकॉर्ड स्तरों से फिसलना शुरू हुआ, चांदी पर दबाव और बढ़ गया।
इंडस्ट्रियल मांग का कमजोर संकेत
चांदी पर दबाव की एक बड़ी वजह औद्योगिक मांग को लेकर कमजोर आउटलुक भी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मैन्युफैक्चरिंग में व्यापक इस्तेमाल के बावजूद—
- वैश्विक वृद्धि की रफ्तार में सुस्ती
- चीन और यूरोप से नरम मांग की आशंका
इन कारणों ने औद्योगिक कमोडिटीज के दृष्टिकोण को कमजोर किया, जिसका असर चांदी की कीमतों पर साफ दिखा।
अमेरिका से आए संकेत भी बने कारण
अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने निकट भविष्य में आक्रामक दर कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन द्वारा केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व प्रमुख के रूप में नामित किए जाने की रिपोर्ट ने भी बाजार भावनाओं को प्रभावित किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अपेक्षाकृत सख्त रुख से डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है।
निष्कर्ष: रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली, औद्योगिक मांग की चिंताएं और अमेरिकी संकेत—इन सबने मिलकर सोना-चांदी में तेज करेक्शन कराया। निवेशकों के लिए आगे का रास्ता वैश्विक आंकड़ों, फेड संकेतों और घरेलू मांग पर निर्भर रहेगा।
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