एआई एक्सपो 2026 में ‘परम ’ ने बटोरी सुर्खियां

  • ‘पैराम’ की प्रमुख विशेषताएँ 
  • स्वायत्त नेविगेशन और रियल-टाइम बाधा पहचान
  • 30 सेंटीमीटर तक सीढ़ियां चढ़ने की क्षमता
  • कम ऊंचाई वाले स्थानों के लिए ‘क्रैब वॉक’ मूवमेंट
  • गिरने के बाद स्वतः रिकवरी सिस्टम

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 19 फरवरी : दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 के बीच एक देसी तकनीकी उपलब्धि ने सबका ध्यान खींचा है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप General Autonomy ने अपने स्वदेशी क्वाड्रुपेड रोबोट ‘पैराम’ को पेश कर यह दावा किया है कि यह “भारत का सबसे शक्तिशाली स्वदेशी रोबोडॉग” है। कंपनी का कहना है कि इसे केवल भारत में असेंबल नहीं किया गया, बल्कि भारतीय इंजीनियरों ने इसे पूरी तरह से देश में डिजाइन और विकसित किया है।

स्टार्टअप इंडिया के दशक में तकनीकी प्रदर्शन

पिछले महीने ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इस रोबोडॉग का प्रदर्शन प्रधानमंत्री Narendra Modi के सामने किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal भी मौजूद थे। कंपनी ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में इसे “राष्ट्र के लिए, इस सदी के लिए” तैयार की गई तकनीक बताया।

‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत 2016 में नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत व्यवसाय करने की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के कर्तव्य की भावना इन पहलों को वैचारिक आधार देती है। ऐसे में ‘पैराम’ जैसे प्रोजेक्ट न केवल तकनीकी प्रगति का संकेत हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़े हैं।

सात महीने की मेहनत और निरंतर सुधार

स्टार्टअप के अनुसार, इस रोबोट पर पिछले सात महीनों से काम चल रहा है। हालांकि टीम ने अपने पूर्व ह्यूमनॉइड प्रोजेक्ट से मिले अनुभव का भी लाभ उठाया। कंपनी का कहना है कि हर पखवाड़े इसमें सुधार किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ‘पैराम’ को बेंगलुरु की सड़कों पर चलते, ट्रैफिक के बीच बाधाओं को पहचानते और 30 सेंटीमीटर तक की सीढ़ियां चढ़ते देखा जा सकता है। कम ऊंचाई वाले स्थानों में प्रवेश के लिए यह ‘क्रैब वॉक’ भी कर सकता है और गिरने के बाद स्वतः संतुलन बना लेता है।

रोबोडॉग: उपयोग और संभावनाएं

दुनिया भर में क्वाड्रुपेड रोबोट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। चार पैरों पर चलने वाली यह मशीनें कठिन भूभाग पर बेहतर संतुलन और गतिशीलता के लिए जानी जाती हैं। औद्योगिक निरीक्षण, आपदा राहत, रक्षा लॉजिस्टिक्स और शोध कार्यों में इनका उपयोग बढ़ रहा है।

भारत में रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की नीति के बीच यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे स्टार्टअप्स को संस्थागत समर्थन और दीर्घकालिक निवेश मिलता रहा, तो भारत वैश्विक रोबोटिक्स मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

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