बिहार : उच्च शिक्षा कानून का ड्राफ्ट स्नातक कॉलेज अब राज्यपाल के बजाय सरकार के अधीन

  • स्नातक कॉलेज सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन, राज्यपाल का दायरा सीमित
  • कॉलेज शिक्षकों के प्रशासनिक फैसले और भर्ती सरकार के हाथ में
  • शिक्षकों के लिए राजनीति में भागीदारी और प्रचार पर रोक
  • असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती में नेट अनिवार्य, पीएचडी जरूरी नहीं

समग्र समाचार सेवा
पटना | 16 जुलाई :
बिहार सरकार आगामी मानसून सत्र में एक नया शिक्षा विधेयक लाने जा रही है, जिसके तहत राज्य के सभी स्नातक (UG) कॉलेज अब सीधे उच्च शिक्षा विभाग के नियंत्रण में आ जाएंगे। वर्तमान में राज्यपाल, जो विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं, स्नातकोत्तर (PG) और स्नातक दोनों स्तर पर नियंत्रण रखते हैं। प्रस्तावित कानून के लागू होने पर राज्यपाल के अधिकार केवल पीजी कोर्स तक सीमित रहेंगे, जबकि 500 से अधिक स्नातक महाविद्यालय पूरी तरह सरकार के अधीन आ जाएंगे।

राजभवन की ओर से फिलहाल विरोध सामने नहीं आया है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 12 जुलाई को एक कार्यक्रम में पुष्टि की कि नया शिक्षा विधेयक आगामी सत्र में पेश होगा और उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने का प्रयास हो रहा है।

इस प्रस्तावित कानून के तहत कॉलेज शिक्षकों के सभी प्रशासनिक, नियुक्ति, पदोन्नति और नीति संबंधी काम सीधे उच्च शिक्षा विभाग देखेगा। कॉलेज शिक्षकों को अब राजनीति में भाग लेने, किसी पार्टी का समर्थन या प्रचार करने की अनुमति नहीं होगी। हर जिले में एक हायर एजुकेशन ऑफिसर नियुक्त होगा, जो स्कूलों के जिला शिक्षा अधिकारी की तरह निगरानी करेगा। डिग्री कॉलेज के शिक्षक अब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर पदोन्नत नहीं हो पाएंगे और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता मास्टर्स डिग्री और नेट होगी, पीएचडी अनिवार्य नहीं होगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारी के अनुसार, नया कानून पटना यूनिवर्सिटी एक्ट और बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज एक्ट को मिलाकर लाया जाएगा। राज्य में फिलहाल 21 विश्वविद्यालयों के अधीन यूजी और पीजी दोनों पाठ्यक्रम चलते हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को 211 नए डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया। सरकार ने हर ब्लॉक में कॉलेज खोलने का लक्ष्य रखा है और अब 500 से ज्यादा सरकारी डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे हैं

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