बंगाल : बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट के बदले नियम
अब बंगाल में केवल सरकारी अधिकारी ही करेंगे जारी, फर्जीवाड़े पर सख्ती
- फर्जी प्रमाणपत्रों के बढ़ते मामलों के बाद नियमों में बदलाव
- राज्यभर में पुराने प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच, केंद्र के पोर्टल से लिंक होगा डाटाबेस
- भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए घर-घर सर्वे और रजिस्टरों की जांच
- पुलिस ने राज्यभर में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े की जांच शुरू की
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता ,24 जुलाई : पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब नगरपालिकाओं के चेयरमैन और पंचायत प्रधान नहीं, बल्कि केवल सरकारी अधिकारी ही बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट जारी करेंगे। मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि प्रमाणपत्र जारी करने में किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई गई तो कड़ी कार्रवाई होगी।
राज्य सरकार ने बताया कि 1997 से अब तक जारी सभी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों की समीक्षा की जाएगी और अवैध प्रमाणपत्र रद्द किए जाएंगे। जिनके पास प्रमाणपत्र नहीं है, उनकी सुनवाई के बाद दस्तावेज जारी होंगे। स्कूल प्रमाणपत्रों में भी फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की शिकायतें मिली हैं।
मुख्य सचिव ने कहा—किसी भी अवैध विदेशी नागरिक को राज्य में रहने नहीं दिया जाएगा और संविदा कर्मियों को प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं मिलेगा। सरकार का मकसद व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है।
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