- नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से लाखों बाल विवाह रोके गए।
- हर गांव में एक बाल विवाह रोकना पूरे समुदाय के लिए बड़ा संदेश है।
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बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए साझा प्रयासों की आवश्यकता बार-बार दोहराई गई।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 1 अगस्त : नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने ‘इंश्योरिंग ए चाइल्ड राइट्स, पोटेंशियल एंड प्रास्पेरिटी’ विषयक चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का उद्घाटन किया।परामर्श का आयोजन बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए देशभर के 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ द्वारा किया गया। मंत्री ने देश के सभी 782 जिलों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार व नागरिक समाज के सहयोग से 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य जरूर हासिल होगा।” उन्होंने बाल संरक्षण के क्षेत्र में चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा—”किसी भी बच्चे की जिंदगी बचाना सबसे नेक काम है। छोटी उम्र की बच्चियों को ट्रैफिकिंग व शोषण से बचाने वाले स्वयंसेवी सचमुच फरिश्ते हैं।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि बाल विवाह खत्म करने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा—”इस अभियान को सफल बनाने में इनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।”
लावु कृष्णा देवरायलु (टीडीपी सांसद, संयोजक—एमपीज फॉर चिल्ड्रेन):“बाल विवाह के खिलाफ यह आंदोलन अब वैश्विक बनता जा रहा है। भारत ने दिखा दिया कि बाल विवाह का खात्मा संभव है।” बच्चों को सोशल मीडिया के खतरों से बचाने के लिए संसद में निजी विधेयक भी पेश किया।
भुवन ऋभु (संस्थापक, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन):“27 नवंबर 2024 को शुरू यह अभियान अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गया है। न्याय, तकनीक, नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों से हर बच्चे के सशक्तीकरण का दृष्टिकोण बना है। “सरकार, नागरिक समाज, अकादमिक जगत, समुदाय और युवा—सभी के साझा प्रयास से बदलाव संभव है।” “पिछले तीन वर्षों में साढ़े पांच लाख से अधिक बाल विवाह सरकार के साथ मिलकर रोके गए।”
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