जस्टिस वर्मा के खिलाफ कैश कांड के आरोप साबित—लोकसभा समिति रिपोर्ट

  • लोकसभा समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में नकदी मिलने के आरोपों की पुष्टि की।
  • रिपोर्ट में कहा गया—जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत, मालिकाना हक और सबूतों की सुरक्षा पर संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहे।
  • स्टोर रूम में हुई छेड़छाड़, नोटों की सही मात्रा तय करना असंभव, रिपोर्ट में दो खंडों में मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल।
  • सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाईकोर्ट के रिपोर्ट/वीडियो में जले, गीले और बिखरे नोटों की पुष्टि; जस्टिस वर्मा ने खुद को साजिश का शिकार बताया।

समग्र समाचार सेवा |

नई दिल्ली, 13 अगस्त :लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर गठित समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में बिना हिसाब-किताब की नकदी मिलने के आरोपों की जांच रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी है। समिति ने पाया कि वर्मा न तो नकदी के स्रोत/मालिकाना हक का संतोषजनक जवाब दे पाए, न ही सबूतों को सुरक्षित रखा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि स्टोर रूम में हुई छेड़छाड़ के कारण नकदी की सही संख्या तय करना संभव नहीं रहा।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 14–15 मार्च 2025 को जज के घर लगी आग के बाद स्टोर रूम में 500-500 के नोटों की बड़ी मात्रा में बरामदगी हुई थी। गवाहों, पुलिस व फायर सर्विस कर्मचारियों ने जले, गीले, बिखरे नोटों को देखा और उनकी गवाही तस्वीर/वीडियो सहित रिपोर्ट में दर्ज की गई। सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी ऐसी तस्वीरें/वीडियो शामिल हैं।

रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के जवाब का भी उल्लेख किया गया—उन्होंने कहा कि स्टोर रूम में न उन्होंने और न ही परिवार ने कभी कैश रखा, और वे साजिश के शिकार हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित समिति की रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा ने पद से इस्तीफा दिया और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें दिल्ली से हटाकर वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश की थी।

इस पूरे मामले ने न्यायपालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण को लेकर राष्ट्रीय चर्चा छेड़ दी है।

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