सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मुआवजा और किराए का आदेश

1953 में ली गई जमीन पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

समग्र समाचार सेवा 

नई दिल्ली, 18 अगस्त :सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को 1953 में बिना औपचारिक अधिग्रहण और मुआवजे के ली गई जमीन के लिए मालिक के वंशज को मुआवजा और 1953 से किराया देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। यह मामला कांगन में पुलिस स्टेशन के लिए ली गई सात कनाल और 18 मरले जमीन से जुड़ा था, जिसे बिना कानूनी प्रक्रिया के अधिग्रहित किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहन की पीठ ने अब्दुल राशिद वानी की याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सात दशक बाद नए सिरे से अधिग्रहण आदेश देना संभव नहीं है, लेकिन 2021 में हाई कोर्ट में याचिका दायर होने की तारीख से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाए।

कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी को निर्देश दिया है कि 1953 से जमीन का किराया गणना कर वानी को भुगतान किया जाए। किराए और मुआवजे की अंतिम राशि हाई कोर्ट तय करेगा। इससे पहले जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने देरी का हवाला देकर याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माना कि राज्य की गैरकानूनी कार्रवाई का खामियाजा वंशज को नहीं भुगतना चाहिए।

यह फैसला भूमि अधिकारों और सरकारी जवाबदेही के लिए एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

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