समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 23 अगस्त :
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत-बांग्लादेश के संबंध तभी आगे बढ़ सकते हैं जब वे दोनों देशों के आपसी हितों की कसौटी पर खरे उतरें। ढाका द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग और प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित दिल्ली यात्रा के बीच यह बयान आया है।
इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में जयशंकर ने कहा, “कोई भी द्विपक्षीय संबंध तभी सफल हो सकता है जब वह आपसी हित में हो—वो उनके लिए भी काम करे, हमारे लिए भी।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसियों से हमेशा अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार काम करने की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि साझा मंच और समाधान जरूरी है।
जयशंकर ने कहा कि दक्षिण एशिया में हर देश की अपनी प्राथमिकताएं हैं, और भारत यथार्थवादी दृष्टिकोण रखता है। उन्होंने समझाया कि दोनों देशों को एक-दूसरे की चिंताओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़ना चाहिए, ताकि कोई साझा समाधान निकल सके।
तारिक रहमान की भारत यात्रा और बांग्लादेश-भारत संबंधों में हाल के तनाव पर उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय रिश्ते तभी फलेंगे जब दोनों पक्षों की अपेक्षाएं पूरी हों। शेख हसीना की भारत में मौजूदगी को लेकर भी बांग्लादेश ने चिंता जताई है। भारत ने रहमान को ब्रिक्स समिट और द्विपक्षीय बैठक के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन तारीख़ अभी तय नहीं हुई है।
जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर “यूनिक” बताया और कहा कि वह पड़ोसी देश ऐसा कोई दूसरा नहीं, जो इतने व्यवस्थित ढंग से आतंक का इस्तेमाल करता हो। चीन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति संभव नहीं।
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-बांग्लादेश के संबंधों में रणनीतिक और कूटनीतिक जटिलताएं बढ़ रही हैं।
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