अमित शाह ने गुजरात विद्यापीठ में दीक्षांत समारोह को किया संबोधित

केंद्रीय गृह मंत्री ने अहमदाबाद में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश और समाज के लिए तय किए गए लक्ष्य कभी निराशा नहीं लाते।

  • केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
  • उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों, शिक्षा प्रणाली के मूल्यों और जीवन में सही लक्ष्य निर्धारण के महत्व पर जोर दिया।
  • इस दौरान उन्होंने खादी उद्योग की अभूतपूर्व प्रगति और गांधी जी द्वारा बताए गए सात सामाजिक पापों का विशेष उल्लेख किया।

अहमदाबाद, 27 अगस्त: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद स्थित ऐतिहासिक गुजरात विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम के दिनों और उनके शैक्षणिक दर्शन को याद किया। गृह मंत्री ने कहा कि गुजरात विद्यापीठ वही पावन स्थल है, जहाँ देश की आजादी की रणनीति तय हुआ करती थी और आचार्य जे.बी. कृपलानी तथा काका साहेब कालेलकर जैसे महान विभूतियों ने जनता को स्वभाषा और भारतीयता के प्रति जागरूक किया था।

विद्यार्थियों को जीवन में लक्ष्य तय करने का संदेश

समारोह के दौरान गृह मंत्री ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे विद्यापीठ का प्रांगण छोड़ने से पहले अपने जीवन का एक स्पष्ट लक्ष्य अवश्य निर्धारित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य तय करते वक्त मन में यह घबराहट या बोझ नहीं होना चाहिए कि वह पूरा होगा या नहीं। यदि कोई लक्ष्य समाज और देश की भलाई के लिए तय किया जाता है, तो उस पर जय-पराजय का बोझ नहीं रहता और जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, कभी निराशा उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने भी कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन समाज हित में कार्य करने के कारण कभी हताशा हाथ नहीं लगी।

गांधीजी के बुनियादी तालीम और शिक्षा के उद्देश्य

गुजरात विद्यापीठ के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री शाह ने कहा कि यह संस्थान गांधी जी की बुनियादी तालीम—ग्राम-केंद्रित विकास और ‘स्व’ से ‘पर’ की सोच यानी खुद की जगह सबकी भलाई सोचने की शिक्षा पर आधारित है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य हाथ, हृदय और मस्तिष्क के समन्वय से राष्ट्र का पुनर्निर्माण होना चाहिए। ऐसी शिक्षा युवाओं के हाथों को कौशल दे, हृदय में संवेदनशीलता जगाए और मस्तिष्क को ज्ञान के साथ विवेक अपनाने के लिए प्रेरित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल ज्ञान से भरा मस्तिष्क व्यक्ति में अहंकार को जन्म देता है, जबकि ज्ञान और विवेक से युक्त मस्तिष्क विनम्रता व विद्वत्ता का विकास करता है।

सात सामाजिक पाप और ग्यारह सूत्रों की प्रासंगिकताअपने संबोधन में गृह मंत्री ने महात्मा गांधी द्वारा बताए गए सात सामाजिक पापों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिनसे हर युवा को बचना चाहिए: सिद्धांत-विहीन राजनीतिनैतिकता-विहीन व्यापारश्रम-विहीन धनविवेक-विहीन भोगचरित्र-विहीन ज्ञानमानवता-विहीन विज्ञानत्याग-विहीन उपासनाउन्होंने कहा कि यदि इन सात पापों का हमेशा बोध रहे, तो समाज की 90 प्रतिशत बुराइयों को अपने आप समाप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने गांधीजी के 11 सूत्रों—अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शरीरश्रम, अस्वाद, अभय, सर्वधर्मसमभाव, स्वदेशी और अस्पृश्यता-निवारण—का पालन करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

खादी और स्वदेशी की बढ़ती ताकतदेश में स्वदेशी और खादी के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने आंकड़े साझा किए कि वर्ष 2013-14 में खादी ग्रामोद्योग का टर्नओवर जो मात्र 31 हजार करोड़ रुपये था, वह वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 87 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी के संस्कारों में इसे शामिल करने के प्रयासों की भी सराहना की। दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिससे युवाओं में भारी उत्साह देखने को मिला।

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