अमित शाह ने किया ‘गुजरात गौरव सरोवर’ का लोकार्पण
केंद्रीय गृह मंत्री ने अमरेली में जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं सूखे की समस्या से निपटने में सबसे बड़ा हथियार हैं।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के अमरेली जिले में ‘गुजरात Gaurav Sarovar’ का उद्घाटन किया।
- यह महत्वाकांक्षी जल संरक्षण परियोजना ढोलकिया फाउंडेशन द्वारा गगाडियो नदी पर तैयार की गई है।
- इस परियोजना से भूजल स्तर में सुधार होगा और क्षेत्र के किसानों व स्थानीय नागरिकों को कृषि व पेयजल के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।
अमरेली (गुजरात), 28 अगस्त: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने गुजरात दौरे के दौरान अमरेली जिले के लाठी तालुका के अंतर्गत आने वाले दुधला गांव में ‘गुजरात गौरव सरोवर’ (Gujarat Gaurav Sarovar) का आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया। गगाडियो नदी पर बने इस भव्य जल संचयन जलाशय का निर्माण धोलकिया फाउंडेशन और हरि कृष्णा ग्रुप के सहयोग से किया गया है। इस अवसर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी सहित कई गणमान्य अतिथि और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह परियोजना क्षेत्र के भूजल स्तर को बढ़ाने और कृषि विकास को गति देने में मील का पत्थर साबित होगी।
जल संरक्षण और प्राचीन भारतीय परंपराएं
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय संस्कृति और प्राचीन ग्रंथों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति कुएं, बावड़ी और तालाबों का निर्माण कराता है, उसे महान पुण्य की प्राप्ति होती है। आज के समय में जब वर्षा का चक्र अनियमित हो रहा है, तब वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजना और भूजल स्तर को ऊपर उठाना बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि समाज मिलकर जल संरक्षण को अपनी आदत बना ले, तो राज्य या देश में कभी भी सूखे की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
21 एकड़ में फैला है यह विशाल जलाशय
लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से तैयार और 21 एकड़ भूमि में फैला यह ‘गुजरात गौरव सरोवर’ लगभग 40 करोड़ लीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता रखता है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से न केवल आसपास के गांवों की सिंचाई की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि गर्मियों के दिनों में पेयजल संकट से भी राहत मिलेगी। ढोलकिया फाउंडेशन द्वारा इस प्रकार के पर्यावरण अनुकूल और सामाजिक हित के कार्य यह दर्शाते हैं कि जब सरकार और जनता के प्रयास मिलते हैं, तो बदलाव कितनी तेजी से आता है। गुजरात में जल क्रांति और सूखे का अंतपुराने दिनों को याद करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2001 से पहले जब राज्य में अन्य दलों की सरकारें थीं, तब गुजरात को भयंकर सूखे और पानी की कमी का सामना करना पड़ता था। लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करते थे। लेकिन वर्ष 2001 में जब नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने जल प्रबंधन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई। अल्प समय में ही डेढ़ लाख से अधिक चेक डैम बनाए गए, जिससे गुजरात की जल तस्वीर बदल गई। सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई (SAUNI) योजना और सुजलाम-सुफलाम योजनाओं के माध्यम से दूर-दराज के सूखे इलाकों तक नर्मदा का पानी पहुंचाया गया।
भविष्य की जरूरत और जन-भागीदारी
अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘जल शक्ति मंत्रालय’ के गठन और देशव्यापी ‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) अभियान से जल संचयन को जन-आंदोलन का रूप मिला है। बिना किसी अतिरिक्त प्रशासनिक जटिलता के देश भर के बांधों की गाद निकालने और जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के अनगिनत प्रयास किए गए हैं। उन्होंने युवाओं और किसानों से अपील की कि वे जल की एक-एक बूंद का सदुपयोग करें और ड्रिप इरिगेशन (टपका सिंचाई) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
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