गृह सचिव गोविंद मोहन ने की हिमालयी आपदा तैयारियों की समीक्षा
नेपाल की भीषण आपदा के मद्देनजर केंद्र सरकार सतर्क, केंद्रीय गृह सचिव ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक।
- केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आपदा तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की है।
- बैठक के दौरान ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOF) और हिमस्खलन (snow avalanches) के बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
- राज्यों को केवल आपदा के बाद राहत कार्य करने के बजाय जोखिम-सूचित योजना (risk-informed planning) और सामुदायिक स्तर पर तैयारी करने की सख्त सलाह दी गई है।
नई दिल्ली, 3 सितंबर: नेपाल में हाल ही में आए भयंकर ग्लेशियर टूटने और विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत सरकार ने अपनी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह से मुस्तैद करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) और हिमस्खलन (Snow Avalanches) जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्यों की तैयारियों का जायजा लेना था।
अर्ली वार्निंग सिस्टम और मॉनिटरिंग पर विशेष जोर
बैठक के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बदल रहे मौसम और जीएलओएफ (GLOF) के बढ़ते जोखिमों की गहन समीक्षा की गई। गृह सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके इलाकों की लगातार और सक्रिय रूप से निगरानी (proactive monitoring) की जानी चाहिए। इसके साथ ही, उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान करने, जल प्रवाह पथ (flow path) का मानचित्र तैयार करने और समय पर चेतावनी जारी करने की व्यवस्था को पुख्ता करने के निर्देश दिए गए। स्थानीय प्रशासन, राज्य एजेंसियों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने को कहा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाए जा सकें।
प्रतिक्रिया आधारित कार्य से आगे बढ़कर निवारक योजना पर फोकस
गृह सचिव गोविंद मोहन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपदा से निपटने की हमारी रणनीति केवल प्रतिक्रियात्मक (response-oriented) नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें जोखिम-सूचित योजना (risk-informed planning), निवारक उपाय (preventive mitigation) और सामुदायिक स्तर की तैयारी (community-level preparedness) की ओर तेजी से आगे बढ़ना होगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे अपनी तैयारियों की नियमित समीक्षा करें, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और निकासी व्यवस्था (evacuation arrangements) में मौजूद कमियों की पहचान करें और किसी भी चरम घटना से पहले आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं।
2024 की परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
बैठक के अंत में गृह सचिव ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि केंद्र सरकार द्वारा साल 2024 में राज्यों को जो GLOF शमन (mitigation) परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं, उनके काम में तेजी लाई जानी चाहिए। केंद्रीय जल आयोग (CWC), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों ने भी इस दौरान अपनी तकनीकी रिपोर्ट साझा की। बैठक का समापन इस निर्देश के साथ हुआ कि कमजोर हिमालयी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि को न्यूनतम करने के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय और जोखिम संबंधी जानकारियों का नियमित आदान-प्रदान जारी रखा जाए।
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