समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 7 सितंबर :गुवाहाटी विश्वविद्यालय का परिसर बुधवार को इतिहास, नवाचार और संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने यहां 110 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया, जिनमें बहुविषयक शैक्षणिक भवन, नया छात्रावास और पुस्तकालय व ऑडिटोरियम के विस्तार कार्य शामिल हैं। इस मौके पर असम के राज्यपाल, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और विश्वविद्यालय के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में गुवाहाटी विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया—यह पूर्वोत्तर भारत का पहला विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 1948 में गुपीनाथ बोरदोलोई जैसे नेताओं की अगुवाई में हुई थी। उन्होंने बताया कि आज यह संस्थान NAAC ग्रेडिंग में A+ और NIRF में राज्य विश्वविद्यालयों में 9वें स्थान पर है।
श्री राधाकृष्णन ने विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय भाषाई धरोहर, ब्रह्मपुत्र बेसिन, बहुभाषिकता, महिला अध्ययन और पर्यावरणीय स्थिरता पर किए गए शोध कार्यों की सराहना की। उन्होंने असमिया और तमिल साहित्य के परस्पर अनुवाद को ‘भारत की सांस्कृतिक एकता’ का प्रतीक बताया और कहा, “भाषा सभ्यता की स्मृति, बुद्धिमत्ता और पहचान का वाहक है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की शिक्षा नीति और देश में IIT, IIM, IIIT, AIIMS आदि की स्थापना की प्रशंसा की। महिलाओं के उच्च शिक्षा नामांकन में 42% की वृद्धि को उन्होंने सशक्तिकरण का बड़ा संकेत कहा। असम में शिक्षा, कनेक्टिविटी, निवेश व रोजगार की उपलब्धियों की भी प्रशंसा की।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने ‘भूपेन हजारिका: हंड्रेड इयर्स ऑफ अ वांडरिंग सॉन्ग्स’ और ‘চন্দ্ৰকান্ত অভিধান’ का विमोचन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में असम की समृद्ध विरासत को दर्शाया गया।
युवाओं को नशे से दूर रहने, समय प्रबंधन और अनुशासन का संदेश देते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उद्धरण दोहराया—“उठो, जागो और जब तक लक्ष्य न मिले, रुको मत!”
गुवाहाटी विश्वविद्यालय की यह ऐतिहासिक यात्रा शिक्षा, संस्कृति और एकता का उत्तर-पूर्व में नया अध्याय जोड़ती है।
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