मेडिकल स्टोर्स पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य
स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग रूल्स में संशोधन का प्रस्ताव रखा, शेड्यूल H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर अब रहेगी कड़ी निगरानी।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 18 सितंबर: देश में प्रतिबंधित और गंभीर चिकित्सा से जुड़ी दवाओं की बिना डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के हो रही बिक्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन करने का प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत देश के सभी खुदरा मेडिकल स्टोरों और फार्मेसियों में क्लोज्ड-सर्किल टेलीविजन (CCTV) कैमरे लगाना अनिवार्य किया जा रहा है। इस नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत करना है।
किन दवाओं की बिक्री पर होगी कड़ी नजर?सरकार द्वारा लाए गए इस नए प्रस्ताव का दायरा मुख्य रूप से उन दवाओं पर है जो डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं बेची जा सकतीं। इनमें मुख्य रूप से शेड्यूल H, H1 और X श्रेणी की दवाएं शामिल हैं। शेड्यूल H और H1: इसके अंतर्गत सामान्य एंटीबायोटिक्स, रक्तचाप, मधुमेह और गंभीर संक्रमण से जुड़ी वे दवाएं आती हैं जिनका बिना चिकित्सकीय परामर्श के सेवन नुकसानदायक हो सकता है। शेड्यूल X: यह सबसे संवेदनशील और कड़ी श्रेणी है, जिसमें नशीले पदार्थ (नारकोटिक्स) और कड़े मनोदैहिक (साइकोट्रॉपिक) पदार्थ शामिल हैं, जिनके दुरुपयोग की आशंका सबसे अधिक होती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सीसीटीवी कैमरे लग जाने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी मेडिकल स्टोर बिना वैध पर्चे के इन संवेदनशील दवाओं को ग्राहकों को न बेचे। हालांकि, यह नियम थोक दवा विक्रेताओं (Wholesalers) पर लागू नहीं होगा, बल्कि यह केवल रिटेल मेडिकल स्टोर्स के लिए ही प्रस्तावित किया गया है।
तीन महीने तक सुरक्षित रखनी होगी फुटेज
प्रस्तावित ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, खुदरा दवा विक्रेताओं को अपनी लाइसेंस प्राप्त परिसर में सीसीटीवी सिस्टम इस तरह से लगाना होगा जिससे काउंटर पर होने वाली बिक्री स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो सके। इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि कैमरे की इन रिकॉर्डिंग्स (फुटेज) को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर नियामक एजेंसियां इसकी जांच कर सकें। सरकार के इस कदम से उन मेडिकल संचालकों पर नकेल कसेगी जो नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से ओवर-द-काउंटर प्रतिबंधित दवाएं बेच देते हैं।
केमिस्ट एसोसिएशन की चिंताएं और प्रतिक्रिया
सरकार के इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद केमिस्टों और दवा व्यापारियों के संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। देश के करीब 15 लाख खुदरा फार्मासिस्टों और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। संघ का कहना है कि हर छोटी मेडिकल दुकान पर सीसीटीवी कैमरे, डीवीआर (DVR), इंटरनेट और स्टोरेज जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं करने से छोटे दुकानदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लगातार बिजली कटौती और इंटरनेट की कम कनेक्टिविटी जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी आड़े आ सकती हैं।
फिलहाल, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पूरे मसले पर आम जनता, विशेषज्ञों और सभी हितधारकों से 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। सभी पक्षों की प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद ही इस नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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