राष्ट्रपति ने चार उच्च न्यायालयों में नियुक्त किए 14 न्यायिक अधिकारी

सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिश पर देश के विभिन्न हाई कोर्ट्स में हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव, न्यायिक प्रणाली को मिलेगी मजबूती।

  • भारत के राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद देश के चार प्रमुख उच्च न्यायालयों में 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की है।
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  • इनमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक उच्च न्यायालय शामिल हैं, जहां नए न्यायाधीश और अतिरिक्त न्यायाधीश पदभार संभालेंगे।
  • सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 10 सितंबर 2026 को इन नामों की सिफारिश की गई थी, जिसके बाद विधि और न्याय मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 20 सितंबर: भारतीय न्यायपालिका को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के साथ गहन परामर्श के बाद चार प्रमुख उच्च न्यायालयों में कुल 14 न्यायिक अधिकारियों को जज और अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया है। विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इन नियुक्तियों से देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण में खासी मदद मिलेगी और न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।

किन उच्च न्यायालयों में हुई हैं नियुक्तियां?

सामने आई आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, जिन चार उच्च न्यायालयों के लिए इन 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियां की गई हैं, उनमें दिल्ली उच्च न्यायालय, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय और कर्नाटक उच्च न्यायालय शामिल हैं। इनमें से सबसे अधिक नियुक्तियां दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए की गई हैं, जहां न्यायिक सेवा से जुड़े योग्य अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इन सभी नामों की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 10 सितंबर 2026 को आयोजित अपनी बैठक में की गई थी, जिसे अब औपचारिक रूप से अमलीजामा पहना दिया गया है।

विभिन्न न्यायालयों का विस्तृत विवरण

नियुक्तियों के इस क्रम में दिल्ली उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों (निविदा अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना) तथा पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों (संजय शर्मा-I, भारत पराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज) को नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के लिए यश पाल बाउरी को न्यायाधीश बनाया गया है। झारखंड उच्च न्यायालय में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी मिली है। वहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय के लिए उषा रानी, के.एस. भरत कुमार और नराले वीरभद्रैया भवानी को अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया गया है।

न्यायिक सुधार और लंबित मामलों पर असर

कानूनी जानकारों का मानना है कि उच्च न्यायालयों में जजों के रिक्त पदों को भरने से मुकदमों के बोझ को कम करने में सीधी मदद मिलेगी। देश की अदालतों में बढ़ते मुकदमों और पेंडेंसी को दूर करने के लिए इस प्रकार की नियुक्तियां बेहद आवश्यक मानी जाती हैं। अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से विशेषकर वाणिज्यिक, सिविल और आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद और अधिक मजबूत होगी।

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