ग्रे डिवोर्स: जेनरेशन एक्स में क्यों बढ़ रहे हैं देर उम्र के तलाक?

पूनम शर्मा

अक्सर तलाक को युवा या मध्यम आयु वर्ग की समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा टूट रही है। आजकल “ग्रे डिवोर्स”—यानी 50 साल से अधिक उम्र के लोगों के बीच होने वाले तलाक—का चलन तेजी से बढ़ रहा है, खासकर जेनरेशन एक्स (1965–1980 के बीच जन्में लोग) में। अमेरिका से लेकर भारत तक, यह सामाजिक बदलाव नई सोच और बदलती प्राथमिकताओं का आईना है।

जेनरेशन एक्स कौन है और इनमें तलाक क्यों बढ़ रहे हैं?

जेनरेशन एक्स वे लोग हैं, जिनका जन्म 1965 से 1980 के बीच हुआ। आज इनकी उम्र 46 से 61 वर्ष के बीच है। अमेरिका में 50 वर्ष से ऊपर के लोगों में होने वाले तलाकों में से लगभग 40% ग्रे डिवोर्स हैं। 1990 में जहां यह दर 5% थी, वहीं 2010 में यह दोगुनी होकर 10% हो गई।

अब यही प्रवृत्ति भारत में भी दिख रही है, वजहें अलग हों या समान, समाज तेजी से बदल रहा है।

ग्रे डिवोर्स के पीछे मुख्य कारण

1. लम्बी आयु:
पहले 60 साल की उम्र को अंतिम पड़ाव मान लिया जाता था, लेकिन अब औसत आयु 80 या 85 वर्ष तक पहुँच रही है। ऐसे में 55 साल की उम्र में भी इंसान सोचता है कि आगे 25-30 साल की ज़िंदगी है—क्या वह उसे उसी रिश्ते में बिताना चाहता है?

2. ‘एम्प्टी नेस्ट’ सिंड्रोम:
बच्चे बड़े होकर घर छोड़ देते हैं, पति-पत्नी अकेले रह जाते हैं। अब सारी जिम्मेदारियाँ पूरी हो चुकी होती हैं, और रिश्ते में आई दरारें साफ दिखने लगती हैं।

3. महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता:
आज महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। वे अब समझौता नहीं करतीं—अगर रिश्ते में खुशी, सम्मान न हो, तो तलाक का फैसला लेना उनके लिए आसान है। भारत में 60% ग्रे डिवोर्स महिलाओं द्वारा शुरू किए जाते हैं

4. भावनात्मक जुड़ाव की चाह:
शादी अब सिर्फ साथ रहना नहीं, बल्कि खुशी, सम्मान और इमोशनल कनेक्शन भी ज़रूरी है। जब ये ना हो, तो तलाक एक जायज विकल्प बन जाता है।
भारत में बदलती पारिवारिक संरचना

संयुक्त परिवारों का विघटन, बच्चों का बाहर जाना, और औसत आयु का बढ़ना—ये सभी भारत में भी ग्रे डिवोर्स के बढ़ते मामलों के पीछे हैं। पिछले 10 वर्षों में 50 साल से ज्यादा उम्र के दंपतियों के तलाक के मामले 40% बढ़े हैं। पहले समाज में तलाक को कलंक माना जाता था, अब सोच बदल रही है।

‘दूसरी पारी’ का दौर

ग्रे डिवोर्स का मतलब केवल अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत भी है। रिटायरमेंट के बाद कई लोग घूमना, नया सीखना, और खुद के लिए जीना शुरू करते हैं। कई कपल्स सोशल मीडिया पर अपनी ‘सेकंड इनिंग्स’ की कहानियां साझा कर रहे हैं।

चुनौतियाँ और संभावनाएँ
  • आर्थिक सुरक्षा:
    देर से तलाक लेने पर पेंशन, सेविंग्स, संपत्ति का बंटवारा चुनौती बन जाता है।
  • एकाकीपन:
    अकेलापन आ सकता है, लेकिन नए दोस्त, गतिविधियाँ सहारा बन सकती हैं।
  • परिवार में बदलाव:
    बच्चे शुरुआत में परेशान हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ वे माता-पिता की खुशी को स्वीकार करते हैं।
निष्कर्ष: बदलती परिभाषा, नया आत्मविश्वास

ग्रे डिवोर्स जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और खुशी की खोज है। जेनरेशन एक्स और उसके बाद की पीढ़ियाँ यह दिखा रही हैं कि प्यार और आज़ादी की कोई उम्र नहीं होती—नई शुरुआत कभी भी हो सकती है।

शादी की बदलती परिभाषा, बदलते समाज और नई सोच के साथ, ग्रे डिवोर्स एक नया सामाजिक सच बनता जा रहा है—शायद यही समय की मांग भी है।

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