पूनम शर्मा
राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने के लिए मंगलवार रात प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। गोकलपुरी, मस्जिद मतोंचक, शालीमार बाग और अन्य क्षेत्रों में बुलडोजर चलाया गया। खासकर मस्जिदों और उनके आसपास बसे घरों पर हुई इस कार्रवाई ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी तरह की अनहोनी रोकी जा सके।
कार्रवाई के दौरान भारी विरोध और हंगामा भी देखने को मिला। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसे अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण करार दिया। ओवैसी की पार्टी AIMIM के नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, विरोध प्रदर्शन किया और धरने की धमकी दी। उनका आरोप था कि प्रशासन जानबूझकर मुस्लिम इलाकों और मस्जिदों को निशाना बना रहा है, जबकि कोर्ट में मामला विचाराधीन था।
रात के अंधेरे में शुरू हुई इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए कि आखिर इतनी देर रात बिजली काटकर और पुलिस का घेरा डालकर यह तोड़फोड़ क्यों की गई। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्हें अपने कागजात तक निकालने का मौका नहीं दिया गया। मस्जिद कमेटी के लोगों ने दावा किया कि अदालत में दस्तावेज़ जमा किए गए थे और केस की सुनवाई भी जारी थी, फिर भी बिना पूरी प्रक्रिया के बुलडोजर चलवा दिया गया।
मस्जिद कमेटी के मुखिया गोविंद खान ने बताया कि वकील की सलाह के बाद ही वे दस्तावेज़ की साफ कॉपी लाने वाले थे ताकि अदालत में सही जवाब दिया जा सके। इसके बावजूद, नोटिस पर नोटिस देकर 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश दे दिया गया और आखिरकार कार्रवाई कर दी गई।
इस दौरान AIMIM समेत कई राजनीतिक दलों के नेता मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सरकार सिर्फ एक समुदाय को परेशान कर रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने घर छोड़ने का वक्त तक नहीं दिया गया, और प्रशासन ने उनके साथ अन्याय किया है।
प्रशासन का पक्ष था कि यह कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण और सार्वजनिक परियोजनाओं के तहत की गई है। उनका कहना था कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाना ज़रूरी है, ताकि विकास कार्य निर्बाध रूप से हो सके। साथ ही, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सख्ती दिखाई और स्थिति को नियंत्रण में रखा।
कुल मिलाकर, दिल्ली में चल रही बुलडोजर कार्रवाई ने एक बार फिर संवेदनशीलता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण मान रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे कानून और विकास की मजबूरी बता रहा है। मामला अभी भी कोर्ट में है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.