अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का भव्य उद्घाटन समारोह

भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने श्रद्धेय अशोक सिंहल के राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया नमन।

  • नई दिल्ली के भारत मंडपम में अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि रहे।
  • केंद्रीय गृह मंत्री ने युवाओं से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए राष्ट्र और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
  • इस अवसर पर ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दिव्य पदचिह्न’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन और राम स्तंभों का डिजिटल लोकार्पण किया गया।

नई दिल्ली, 27 सितंबर: भारतीय संस्कृति के संवाहक, सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता श्रद्धेय अशोक सिंहलजी की जन्मशताब्दी वर्ष का भव्य उद्घाटन समारोह नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इस गरिमामयी और ऐतिहासिक कार्यक्रम में देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत 100 वेदपाठी बटुकों द्वारा शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई, जिससे पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं अशोक सिंहल: अमित शाह

समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश के युवाओं को श्रद्धेय अशोक सिंहलजी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अशोक जी ने अपना संपूर्ण जीवन देश, समाज और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए होम कर दिया था। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता सदैव देशवासियों के लिए स्मरणीय रहेगी। गृह मंत्री ने विश्व हिंदू परिषद और अशोक सिंहल फाउंडेशन द्वारा जन्मशताब्दी वर्ष मनाए जाने के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी।

दृढ़ संकल्प और संवेदनशीलता का दुर्लभ संगम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने संबोधन में कहा कि अशोक सिंहलजी के व्यक्तित्व में विचारों की दृढ़ता और दूसरों के दुःखों के प्रति असीम संवेदनशीलता का एक दुर्लभ संगम देखने को मिलता था। वे जो ठान लेते थे, उसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे। उनका ध्यान कभी इस बात पर नहीं होता था कि काम कितना कठिन है, बल्कि इस बात पर होता था कि उसे सिद्ध कैसे किया जाए। कार्यक्रम में युगपुरुष महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज का पावन सान्निध्य भी प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दिव्य पदचिह्न’ नामक विशेष ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया गया, जो भारतीय समाज पर भगवान श्री राम के जीवन-मूल्यों और उनके सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित करती है। साथ ही, अयोध्या में राम वन-गमन पथ पर स्थापित किए जाने वाले ‘श्री राम स्तंभों’ का डिजिटल लोकार्पण भी किया गया। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि यह वर्ष उनके आदर्शों और सेवा भाव को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प वर्ष है।

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