रमेश अग्रवाल बने ‘राष्ट्रीय कवि संगम’ के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष
संस्थापक-अध्यक्ष जगदीश मित्तल के देवलोकगमन के बाद संगठन की कमान वरिष्ठ साहित्यकार रमेश अग्रवाल को सौंपी गई, इंद्रेश कुमार रहे मौजूद।
- राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक-अध्यक्ष जगदीश मित्तल के निधन के बाद रमेश अग्रवाल को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- वरिष्ठ आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में रमेश अग्रवाल को यह नई राष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- इस नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही संगठन हिंदी कविता, साहित्य और सांस्कृतिक संवर्धन के अपने अभियानों को और आगे बढ़ाएगा।
नई दिल्ली, 28 सितंबर: भारतीय साहित्य, संस्कृति और काव्य जगत के प्रमुख संगठन ‘राष्ट्रीय कवि संगम’ (Rashtriya Kavi Sangam) के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। संगठन के संस्थापक और मार्गदर्शक अध्यक्ष रहे जगदीश मित्तल के दुखद निधन के बाद रिक्त हुए पद पर अब रमेश अग्रवाल को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। साहित्यिक और सांस्कृतिक गलियारों में इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है। संगठन से जुड़े लोगों का मानना है कि नए नेतृत्व के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कवि संगम अपनी स्थापना के मूल उद्देश्यों को और अधिक व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में सफल रहेगा।
इंद्रेश कुमार की उपस्थिति में हुआ दायित्व हस्तांतरण
रमेश अग्रवाल को यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारी एक विशेष गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान सौंपी गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति में औपचारिक रूप से यह दायित्व रमेश अग्रवाल को सौंपा गया। वक्ताओं ने इस दौरान स्व. जगदीश मित्तल के योगदान कोदद याद करते हुए कहा कि उन्होंने जिस निष्ठा और समर्पण के साथ देश भर में कवियों को मंच प्रदान किया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अलख जगाई, वह हमेशा स्मरणीय रहेगा।
साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगी नई दिशा
स्वर्गीय जगदीश मित्तल ने राष्ट्रीय कवि संगम की नींव रखकर इसे देश के कोने-कोने तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके नेतृत्व में संस्था ने हिंदी कविता, लोक साहित्य और वैचारिक संवर्धन के क्षेत्र में कई मील के पत्थर स्थापित किए थे। अब रमेश अग्रवाल के अध्यक्ष बनने के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। यह परिवर्तन संगठन के लिए एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है, जिसके तहत आने वाले दिनों में देश भर में काव्य गोष्ठियों, साहित्यिक सम्मेलनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन और अधिक तीव्र गति से किया जाएगा।
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