ज्ञानेश कुमार नहीं, सीधे प्रधानमंत्री मोदी का इस्तीफा मांगो: केजरीवाल

एक मीडिया कॉन्क्लेव में बोलते हुए आम आदमी पार्टी प्रमुख ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर हो रहे हैं, इसलिए निशाना सीधे 'बॉस' पर होना चाहिए।

  • आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बजाय सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगने की सलाह दी है।
  • केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयुक्त ने जो भी कदम उठाए हैं, वे अपने लिए नहीं बल्कि अपने ‘बॉस’ (प्रधानमंत्री) के इशारे पर किए हैं।
  • मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन किए जा रहे हैं।

नई दिल्ली, 29 सितंबर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सियासत में चुनाव आयोग (Election Commission) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक बड़ा बयान सामने आया है। एक निजी समाचार चैनल के कॉन्क्लेव में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि अलग-अलग संगठनों और दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है, लेकिन असल निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होने चाहिए क्योंकि सब कुछ उनके इशारे पर हो रहा है।

“ज्ञानेश कुमार ने अपने लिए नहीं, बॉस के लिए किया सब”

हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मामलों को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों द्वारा प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “लोग बार-बार जंतर-मंतर पर आंदोलन करने कितनी बार जाएंगे? पहले उन्होंने अन्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की और अब मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है। सीधे ‘बॉस’ का इस्तीफा मांग लीजिए ना! ज्ञानेश कुमार ने जो कुछ भी किया है, वह अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि अपने ‘बॉस’ के कहने पर किया है। इसलिए आंदोलन का रुख सरकार के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ होना चाहिए।पूरी व्यवस्था केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।

विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल

गौरतलब है कि देश भर में मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर विपक्षी दलों और असंतुष्ट संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल सत्ता पक्ष के राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव के और अधिक बढ़ने के पूरे आसार हैं।

 

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