गुजरात में ‘ऑपरेशन गंगाजल’ के तहत दो IAS अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति

समग्र समाचार सेवा 

गांधीनगर,2 अक्टूबर :गुजरात सरकार ने गुरुवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो अधिकारियों के. राजेश और गौरव दहिया को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन गंगाजल’ के तहत की गई, जिसे भ्रष्टाचार के आरोपों, विभागीय कार्रवाई और गंभीर कदाचार से जुड़े मामलों में अधिकारियों की सेवा समीक्षा के तौर पर बताया गया है।

के. राजेश पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले

2011 बैच के IAS अधिकारी के. राजेश पहले से निलंबित चल रहे थे। उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति आपराधिक जांच और उन मामलों से जुड़ी कार्यवाही के बीच हुई, जिनमें कथित रिश्वतखोरी, सरकारी जमीन के आवंटन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं।

राजेश अप्रैल 2018 से जून 2021 के बीच सुरेंद्रनगर के कलेक्टर रहे थे। इसी कार्यकाल से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में CBI ने 2022 में उन्हें गिरफ्तार किया था। उन पर हथियार लाइसेंस जारी करने और सरकारी जमीन के आवंटन के संबंध में रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए थे। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उन्हें Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया और अभियोजन शिकायत दायर की।

राजेश 2011 बैच के अधिकारी हैं और उन्होंने पांडिचेरी विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में BTech किया था। IAS में शामिल होने के बाद उन्होंने जूनागढ़ और सूरत में सहायक कलेक्टर तथा सूरत में जिला विकास अधिकारी के रूप में भी काम किया।

गौरव दहिया पर विभागीय जांच

2010 बैच के IAS अधिकारी गौरव दहिया गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। गुजरात सरकार के अनुसार, उनके खिलाफ सेवा के दौरान विभिन्न विभागीय कार्यवाहियों, विवादों और कथित कदाचार से जुड़ी जांच हुई थी, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से संबंधित मामले भी शामिल थे।

दहिया को अगस्त 2019 में एक राज्य जांच समिति द्वारा आरोपों में प्रथम दृष्टया आधार पाए जाने के बाद निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ एक दिल्ली निवासी महिला ने बहुविवाह और पेशेवर कदाचार से जुड़े आरोप लगाए थे। दहिया ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि उन्हें फंसाया और ब्लैकमेल किया गया। दिल्ली पुलिस ने बाद में महिला की शिकायत से जुड़े मामले में उन्हें क्लीन चिट दी थी। हालांकि, गुजरात सरकार ने उस समय कहा था कि उनके खिलाफ अन्य शिकायतों से संबंधित विभागीय जांच जारी थी।

नवंबर 2019 में दहिया के वित्तीय लेन-देन से संबंधित एक अलग जांच भी शुरू की गई थी। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी वी.एस. गढ़वी को इन आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।

गुजरात सरकार ने जुलाई 2023 में करीब चार साल बाद दहिया का निलंबन समाप्त कर दिया था और उन्हें गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त नियुक्त किया था। वह गुरुवार तक इसी पद पर कार्यरत रहे।

42 वर्ष की उम्र में अनिवार्य सेवानिवृत्ति

दहिया की उम्र अनिवार्य सेवानिवृत्ति के समय 42 वर्ष थी। उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति 2044 में होनी थी, यानी उनके पास लगभग 18 वर्ष की सेवा बाकी थी। उन्होंने 2007 में दिल्ली के AIIMS से MBBS किया था और 2010 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद IAS में शामिल हुए थे।

गुजरात सरकार की यह कार्रवाई उन अधिकारियों की सेवा समीक्षा के व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार, विभागीय कार्रवाई या गंभीर कदाचार से संबंधित मामले लंबित हैं। हालांकि, दोनों अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांचों की कानूनी स्थिति अलग-अलग है और आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं माने जाते।

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