समग्र समाचार सेवा
जयपुर ,राजस्थान 5 अक्टूबर :भारत में गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और वन्यजीव विशेषज्ञों की मौजूदगी में राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड छोड़े गए। यह कदम सरकार की Project GIB संरक्षण पहल का हिस्सा है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल है। कभी देश के कई हिस्सों में पाए जाने वाले इस पक्षी की संख्या लगातार घटती गई है। राजस्थान अब इसके संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। पक्षियों को संरक्षण केंद्रों में प्रजनन कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया और इसके बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में वापस लाने की दिशा में कदम उठाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रजाति के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना, बिजली की हाई-वोल्टेज लाइनों से टकराव, कम प्रजनन दर और मानवीय गतिविधियों का बढ़ता दबाव शामिल है।
गोडावण संरक्षण कार्यक्रम में कृत्रिम प्रजनन, वैज्ञानिक निगरानी और प्राकृतिक आवास में पुनर्वास को विशेष महत्व दिया जा रहा है। संरक्षण केंद्रों में पैदा हुए पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण में ढालने के बाद जंगल में छोड़ा जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पक्षियों को जंगल में छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। उनके लिए सुरक्षित आवास, पर्याप्त भोजन और पानी तथा बिजली की लाइनों से सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
भारत में जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का अस्तित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजस्थान में जारी यह परियोजना सफल होती है तो देश में इस दुर्लभ प्रजाति की संख्या बढ़ाने के प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है।
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