ग्वालियर में एशिया की पहली टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के विजन से मध्य प्रदेश के ग्वालियर को मिलने जा रही है एशिया की पहली टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ), 24 कंपनियों ने 5,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा।
- एशिया की पहली टेलीकॉम ज़ोन: ग्वालियर में स्थापित होने जा रही यह ज़ोन देश और एशिया की पहली समर्पित ‘टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन’ होगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।
- भारी-भरकम निवेश और रोजगार: लगभग 24 प्रमुख कंपनियों ने इस परियोजना में 5,500 करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे करीब 18,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- प्लग-एंड-प्ले मॉडल और वित्त पोषण: इस परियोजना को विशेष ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे के लिए 493 करोड़ रुपये की 100% वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
समग्र समाचार सेवा
ग्वालियर, 6 अक्टूबर: मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर ग्वालियर अब औद्योगिक मानचित्र पर एक नया और स्वर्णिम इतिहास रचने जा रहा है। केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप ग्वालियर को एशिया की पहली समर्पित ‘टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन’ (TMZ) की सौगात मिलने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल ग्वालियर-चंबल संभाग का औद्योगिक कायाकल्प होगा, बल्कि भारत वैश्विक टेलीकॉम तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी और अधिक मजबूत होकर उभरेगा।
क्या है टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ)?
विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की तर्ज पर ग्वालियर में विकसित की जा रही यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन एक विशेष ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर आधारित होगी। इस आधुनिक मॉडल के तहत निवेशकों को तैयार बुनियादी ढांचा, सामान्य सुविधाएं (कॉमन फैसिलिटीज) और एक अनुकूल औद्योगिक वातावरण मिलेगा, जिससे कंपनियां कम से कम समय में अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां शुरू कर सकेंगी। यह ज़ोन टेलीकॉम उपकरणों, कलपुर्जों, ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडक्टर और 5G व 6G जैसी उन्नत तकनीकों से जुड़ी निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही यह रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और परीक्षण क्षमताओं को भी सशक्त करेगा।
24 कंपनियों द्वारा 5,500 करोड़ रुपये का भारी निवेश
इस परियोजना को लेकर निवेशकों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। शुरुआती चरणों में ही देश-विदेश की 24 प्रमुख कंपनियों ने इस ज़ोन में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन कंपनियों द्वारा कुल 5,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है, जिससे क्षेत्र के युवाओं के लिए लगभग 18,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। निवेशकों की भारी मांग को देखते हुए सरकार ने इस क्षेत्र के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि चिन्हित करने की योजना भी तैयार कर ली है।
केंद्र और राज्य सरकार की मजबूत भागीदारी
परियोजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं:
केंद्र सरकार का वित्तीय सहयोग: भारत सरकार द्वारा इस परियोजना के पहले चरण के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 493 करोड़ रुपये की 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग ने लगभग 500 करोड़ रुपये के पैकेज के साथ एक ‘कॉमन टेस्टिंग लैब’ स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा है।
भूमि उपलब्धता: मध्य प्रदेश सरकार ने श्रीमंत माधवराव सिंधिया काउंटर मैगनेट सिटी (SADA) और आईटी पार्क के अंतर्गत लगभग 170 एकड़ भूमि इस परियोजना के लिए निशुल्क उपलब्ध कराई है।
विशेष प्रयोजन वाहन (SPV): परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए मध्य प्रदेश सरकार की 51% और दूरसंचार विभाग की 49% इक्विटी भागीदारी के साथ एक स्पेशल पर्पस व्हीकल का गठन किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की निगरानी और आगामी कार्यक्रम
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्वयं इस परियोजना स्थल (SADA) का दौरा कर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठकें की हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण और आधारभूत कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं ताकि निवेशकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए, आगामी 29 अक्टूबर को ग्वालियर में इस अत्याधुनिक टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन का भव्य शिलान्यास (Groundbreaking Ceremony) आयोजित किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस समारोह में ज़ोन में निवेश करने वाली 24 वैश्विक कंपनियां भी अपनी परियोजनाओं की आधिकारिक शुरुआत करेंगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में मील का पत्थर
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन के अनुरूप यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन देश को तकनीकी रूप से स्वावलंबी बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगी। ग्वालियर के पास पहले से ही उत्कृष्ट तकनीकी संस्थानों और हर साल निकलने वाले हजारों प्रतिभाशाली इंजीनियरों का मजबूत आधार है, जो इस नए औद्योगिक केंद्र को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने में पूरी तरह सक्षम है। यह परियोजना निश्चित रूप से ग्वालियर को देश का प्रमुख हाई-टेक और टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग कैपिटल बना देगी।
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